पाबौ गांव की प्रियंका अपने परिवार में सबसे बड़ी है। कक्षा 1 से 8वीं तक अपनी कक्षा में हमेशा अव्वल रही। प्रत्येक विषय में प्रथम श्रेणी के अंक प्राप्त किए हैं। वर्ष 2014 में आठवीं के बाद वह घर पर ही है। कारण, गांव से इंटर कालेज सात किमी दूर है। पिता की माली हालत भी आड़े आ गई।
रोशनी पांच भाई-बहनों में तीसरी है। पढ़ाई के साथ स्कूल में अन्य गतिविधियों में प्रतिभाग करने वाली यह बेटी तीन वर्ष पहले आठवीं के बाद से घर में ही है। स्कूल की दूरी ने पढ़ाई छुड़ा दी, जिसका मलाल उसे आज भी है। उसकी बड़ी बहन भी आठवीं तक ही पढ़ पाई थी।
यह स्थिति केवल प्रियंका या रोशनी की ही नहीं है, बल्कि पाबौ गांव की सभी लड़कियों की है। आठवीं से आगे पढ़ने के लिए उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए सात किमी दूर जीआईसी पीड़ा या इतनी ही दूर ग्वेसड़ जाना पड़ता है। ऐसे में बेटियों के टीचर, इंजीनियर या वैज्ञानिक बनने के सपने दफन हो रहे हैं।
अगस्त्यमुनि ब्लाक के पाबौ गांव की वर्तमान में 22 बेटियां आठवीं की पढ़ाई के बाद घर में बैठी हैं। कारण उससे आगे की पढ़ाई के लिए स्कूल दूर होना एक बड़ी वजह है। दुर्गा, चंद्रकला और यशोदा कहती हैं कि स्कूल नजदीक होता तो वे भी अपनी पढ़ाई जारी रख सकती थीं। स्कूल की दूरी और घर की माली हालत उनके राह में रोड़ा बन गई।
ग्राम प्रधान बीरा देवी, मुरली लाल, शंभू सिंह, मोहन सिंह, रणवीर सिंह आदि का कहना है कि माध्यमिक स्कूल नहीं होने से बेटियां आगे नहीं पढ़ पा रही हैं। ऐसे में उनके वैवाहिक रिश्तों को लेकर भी समस्या हो रही हैं। जूनियर हाईस्कूल पाबौ के शिक्षक जयलाल बताते हैं वर्तमान सत्र में कक्षा 6 से 8 तक 15 बालिकाएं हैं। केदारघाटी के गौंडार और तोषी गांव के बच्चों को भी 9वीं की पढ़ाई के मीलों पैदल चलना पड़ रहा है। ऐसे में दोनों गांवों से बीते चार वर्षों में 10 बेटियां 8 वीं के बाद पढ़ाई छोड़ चुकी हैं।
बेटियां अधिक
वर्तमान शिक्षण सत्र में जनपद में कक्षा 6 से 12 वीं तक सरकारी स्कूलों में छात्राओं की संख्या छात्रों के मुकाबले अधिक है। यहां छात्र 11200 और छात्राएं 11639 हैं।
यहां भी मुश्किलें कम नहीं
जीजीआईसी रुद्रप्रयाग में स्थापना के बाद से अब तक इंटर स्तर पर साइंस की मान्यता नहीं है। ऐसे में यहां की अधिकांश छात्राओं को 10वीं के बाद विज्ञान वर्ग में प्रवेश के लिए जीआईसी या फिर श्रीनगर जाना पड़ता है। जीजीआईसी अगस्त्यमुनि व कन्या हाईस्कूल ऊखीमठ में भी कक्षा- कक्ष व भौतिक संसाधनों की कमी में पठन-पाठन हो रहा है।
बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्राथमिक से लेकर माध्यमिक स्तर पर विभागीय स्तर पर हरसंभव प्रयास हो रहे हैं। जूनियर हाईस्कूल पाबौ के उच्चीकरण का प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। उम्मीद है कि आगामी शिक्षण सत्र में यहां नौंवी कक्षा शुरू हो जाएगी।
- सुभाषचंद्र भट्ट, मुख्य शिक्षाधिकारी रुद्रप्रयाग