गंगा को साफ करने में खर्च हो रहे 20,000 करोड़
गंगा को साफ सुथरा बनाया जा सके, इसके लिए साल 2014 में शुरू किए गए नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा अभियान के तहत 20 हजार करोड़ रुपये खर्च करके सैकड़ों योजनाएं धरातल पर उतरी जा रही हैं। जहां उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, यूपी और पश्चिम बंगाल में गंगा के किनारे 265 घाट बनाए जा रहे और 92 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जा रहे, वहीं, नदी के किनारे 1,34,106 हेक्टेयर जमीन पर वनीकरण का काम कराया जा रहा है। वनीकरण का डीपीआर देहरादून स्थित फॉरेस्ट इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों की ओर से तैयार किया गया है।
गंगा नदी के जलीय जंतुओं को सुरक्षित करने के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान और सिफरी के विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। इसके लिए देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान और सेंट्रल इंलैंड फिशरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिफरी) के
विशेषज्ञों की भी मदद ली जा रही है। वन्यजीव संस्थान के वन्यजीव विज्ञानियों की ओर से उत्तराखंड से लेकर पश्चिम बंगाल तक जलीय जंतुओं के संरक्षण को लेकर शोध करने के साथ संरक्षण को लेकर कई योजनाएं संचालित की जा रही है।
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स्कूली बच्चों को गंगा नदी के संरक्षण के प्रति जागरूक करने के साथ ही गंगा की जैव विविधता के बारे में जागरूक किया जा सके, इसके लिए फिलहाल भारतीय वन्यजीव संस्थान की ओर से 20 बड़ी कार्यशालाओं का भी आयोजन किया गया है।
-डॉ. रुचि बडोला, नोडल अधिकारी, नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा