विकासनगर के प्राथमिक विद्यालय उदियाबाग में पढ़ने वाली पांचवीं की छात्रा सुनैना, चौथी की अंजली और दूसरी के रॉबिन की पढ़ाई के दौरान एक नजर किताब तो दूसरी छत पर रहती है। ऐसा ही कुछ हाल स्कूल के अन्य 35 छात्र-छात्राओं का बना रहता है।
63 साल बाद भी मरम्मत न होने से भवन जीर्णशीर्ण स्थिति में पहुंच गया है। छत और दीवारों का प्लास्टर झड़ना आम बात हो गई है। सोमवार को प्लास्टर का एक बड़ा हिस्सा झड़कर फर्श पर आने से अफरातफरी मच मई। गनीमत यह रही कि उस दौरान छात्र मौजूद नहीं थे। जिससे बड़ा हादसा टल गया।
सुध लेनी जरूरी नहीं समझी
वर्ष 1950 में बने स्कूल भवन की शिक्षा विभाग ने अभी तक सुध लेनी जरूरी नहीं समझी। प्रधानाध्यापक ऋषिपाल सिंह का कहना है कि छत और दीवारों का प्लास्टर आए दिन झड़ता रहता है। जिससे हमेशा अनहोनी की आशंका बनी रहती है। बारिश में भवन टपकने लगता है।
विद्यालय प्रबंधन समिति की अध्यक्ष प्रीति देवी का कहना है कि विभाग को कई बार प्रस्ताव भेजने के बावजूद विभागीय रवैया उपेक्षित बना है। बीईओ आरएस राणा ने कहा कि दैवी आपदा के तहत 24 स्कूलों की मरम्मत का प्रस्ताव परियोजना अधिकारी को भेजा गया है। स्कूल के निरीक्षण के लिए किसी अधिकारी को भेजा जाएगा।
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