उत्तराखंड में छात्रवृत्ति घोटाले में समाज कल्याण विभाग, कॉलेजों और दलालों के साथ जाली प्रमाणपत्र बनाने वाला गिरोह भी शामिल है।
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गिरोह घोटाला करने वाले कॉलेजों को फर्जी प्रमाणपत्र मुहैया कराता है। गिरोह तहसीलों में सक्रिय है। छात्रवृत्ति घोटाले की जांच कर रही समिति छात्रवृत्ति के कागजात के साथ लगने वाले जाति प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र की भी जांच कराएगी।
शुरुआती जांच में गड़बड़ी
शुरुआती जांच में इनमें गड़बड़ी मिली है। सूत्रों ने बताया कि जब फर्जी लाभार्थी को खड़ा कर छात्रवृत्ति हजम कर ली गई तो प्रमाण पत्र कहां से असली हो जाएंगे। प्रमाण पत्रों की फोटो स्टेट सुरक्षित कर ली जा रही है।
हरिद्वार के अलावा निदेशालय स्तर से अन्य जिलों के कालेजों की जांच के लिए टीमें तैयार हैं। कमेटियों ने जिला समाज कल्याण विभाग कार्यालयों से वर्ष 2013-14 का रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा है।
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इसकी छानबीन के बाद पिछले सालों का लेखा-जोखा मांगा जाएगा। समाज कल्याण विभाग के निदेशक विनोद कुमार सुमन का कहना है कि जहां से शिकायत मिलती रहेगी, वहां की जांच कराते रहेंगे।
वर्ष 2013-14 में छात्रवृत्ति
अनुसूचित जाति
- कुल बजट-38 करोड़ 66 लाख
- खर्च हुआ 31 करोड़
- लाभार्थी-26052
पिछड़ी जाति
गढ़वाल
कुल बजट - तीन करोड़ 21 लाख
खर्च किया - एक करोड़ 62 लाख
लाभार्थी - 3884 छात्र
कुमाऊं
कुल बजट - एक करोड़ 40 लाख
खर्च किया - एक करोड़ 10 लाख
लाभार्थी - 2395 छात्र
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