लेकिन नौटियाल के मामले में ये कार्रवाई नहीं हुई। शासन के अधिकारियों का कहना था कि एसआईटी की ओर से नौटियाल सरेंडर करने और उन्हें न्यायिक अभिरक्षा पर भेजे जाने को लेकर उन्हें कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई। एसआईटी के अभियोजन अधिकारी आयुष अग्रवाल ने भी शुरुआत में यही कहा कि एसआईटी की ओर से शासन को कोई सूचना नहीं भेजी जानी है।
इस बीच जब मामले ने तूल पकड़ा तो अग्रवाल ने गत 15 नवंबर को शासन को छात्रवृत्ति घोटाले की जांच में सरेंडर करने वाले समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों के बारे में सूचना भेज दी। इनमें संयुक्त निदेशक गीता राम नौटियाल का नाम भी शामिल है। सूचना प्राप्त होने के बाद शासन स्तर पर पहले से तैयार ड्राफ्ट के आधार पर नौटियाल के निलंबन आदेश जारी कर दिए गए। निलंबन के दौरान उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
हाईकोर्ट में जमानत के लिए अर्जी लगाई
समाज कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक गीता राम नौटियाल ने गत 13 नवंबर को हाईकोर्ट में जमानती प्रार्थना पत्र लगा दिया है। न्यायालय ने उनके प्रार्थना पत्र पर प्रदेश सरकार को 10 दिन में काउंटर फाइल करने के लिए कहा है। 26 नवंबर को नौटियाल की अर्जी पर सुनवाई है।