नौटियाल एक नवंबर को 14 दिन के रिमांड पर जेल भेजे गए थे। इसके बाद यह माना जा रहा था कि शासन उन्हें निलंबित कर देगा। बुधवार को नौटियाल की रिमांड अवधि के 13 दिन पूरे हो जाएंगे, लेकिन अब तक शासन में उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है।
इसे नौटियाल की शासन में तगड़ी पैंठ के तौर पर देखा जा रहा है। इसके विपरीत जनजातीय कल्याण विभाग के उपनिदेशक अनुराग शंखधर के मामले शासन स्तर से निलंबन की कार्रवाई कर दी गई थी।
आखिरी क्षण तक गिरफ्तारी से बचते रहे हैं नौटियाल
नौटियाल गिरफ्तारी से बचने के लिए खूब हाथ पांव मारते रहे हैं। एसआईटी ने जब उनकी गिरफ्तारी के लिए वारंट और कुर्की के आदेश जारी कराए, तब नौटियाल सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। सुप्रीम कोर्ट से जब उन्हें एसआईटी के समक्ष सरेंडर करने के आदेश हुए तब जाकर उन्होंने एसआईटी के रोशनाबाद स्थित कार्यालय में सरेंडर किया। फिर उन्हें अदालत ने रिमांड पर जेल भेज दिया।