उत्तराखंड में रुद्रपुर जिले में दशमोत्तर छात्रवृत्ति घोटाले में कई समाज कल्याण अधिकारी जांच के दायरे में हैं। वर्ष 2011 से 2015 के बीच जिले में सात समाज कल्याण अधिकारी तैनात रहे हैं। इन सातों जिला समाज कल्याण अधिकारियों को जांच से गुजरना होगा।
जिले में दशमोत्तर छात्रवृत्ति घोटाले में एसआईटी ने हरियाणा के तीन और मेरठ के एक शिक्षण संस्थान के खिलाफ बाजपुर और जसपुर कोतवाली में केस दर्ज कराया था। 15 दलालों के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है।
बाजपुर और जसपुर के विवेचकों ने छात्रवृत्ति घोटाले की जांच के लिए समाज कल्याण विभाग को नोटिस दिया था। विवेचकों ने 2011 से 2015 के बीच तैनात रहे जिला समाज कल्याण अधिकारियों, छात्रवृत्ति अनुभाग में तैनात रहे लिपिकों के बारे में जानकारी मांगी है।
पुलिस ने यह भी पूछा है कि 2011 से 2015 के बीच कितने आवेदन आए? कितने छात्रों की छात्रवृत्ति स्वीकृत की गई? छात्रवृत्ति के दस्तावेजों की जांच किसने की? इन आवेदनों को किसने पास किया? सूत्र बताते हैं कि ऊधमसिंह नगर जिले में 2011 से 2015 के बीच कुल सात जिला समाज कल्याण अधिकारियों की तैनाती रही। इन सभी अधिकारियों को जांच से गुजरना होगा।
ये जिला समाज कल्याण अधिकारी रहे तैनात
जिले में नौ जुलाई 2008 से 19 जुलाई 2011 के बीच नीरज चिलकोटी, 19 जुलाई 2011 से आठ मार्च 2013 तक जगमोहन सिंह कफोला, 11 मार्च 2013 से 30 जून 2013 तक हरीश चंद्र सिंह राणा (सेवानिवृत्त), 30 जून 2013 से 19 अक्तूबर 2013 तक आरसी तिवारी, 19 अक्तूबर 2013 से 27 मई 2014 तक जगमोहन सिंह कफोला, 27 मई 2014 से दो दिसंबर 2015 तक अनुराग शंखधर रहे। इसके बाद दो दिसंबर 2015 से 28 जुलाई 2017 तक वर्षा के पास प्रभारी अधिकारी के रूप में चार्ज था।