उधर, एसआई शैलेंद्र ममगाईं ने रामानंद इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी एंड मैनेजमेंट के प्रबंधन के खिलाफ कोतवाली ज्वालापुर में मुकदमा दर्ज कराया है। आरोप है कि वर्ष 2012 से लेकर वर्ष 2017 तक 5.75 करोड़ की धनराशि छात्रवृत्ति के नाम पर दी गई। यहां भी छात्रवृत्ति छात्रों के खातों में ट्रांसफर न होकर सीधे प्रबंधन के खाते में ट्रांसफर कर दी गई। आरोप है कि जिन छात्रों का दाखिला दिखाया गया, उन्होंने परीक्षाएं ही नहीं दी।
छात्रवृत्ति घोटाले से जुड़ा तीसरा मुकदमा सिडकुल थाने में दर्ज कराया गया है। एसआईटी की ओर से मानव भारती विश्वविद्यालय सोलन (हिमाचल प्रदेश) के प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की गई है। आरोप है कि छात्रवृत्ति के नाम पर विवि में वर्ष 2011 से वर्ष 2017 तक कई शैक्षणिक सत्रों में फर्जी दाखिले दिखाकर 3.68 करोड़ की धनराशि हड़पी गई है।
एसआईटी के ढुलमुल रवैये का कॉलेज प्रबंधन पूरा लाभ उठा रहे हैं। इस तरह की बात भी सामने आ रही है कि तीन कॉलेज प्रबंधन ने हाईकोर्ट से स्टे भी ले लिया है। यदि ऐसा हुआ है तो यह एसआईटी के लिए झटका ही है।
एसआईटी प्रभारी मंजू नाथ टीसी का कहना है कि छात्रवृत्ति घोटाले की जांच कर रही एसआईटी की ओर से तीन निजी शिक्षण संस्थानों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराए गए हैं। अब आगे की जांच संबंधित थाने और कोतवाली की स्थानीय पुलिस करेगी। विवेचनाधिकारी को साक्ष्य उपलब्ध करा दिए जाएंगे।
एसाआईटी इस बहुचर्चित घोटाले में तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी अनुराग शंखधर को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। उनकी गिरफ्तारी के बाद से ही सहायक समाज कल्याण अधिकारियों पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटक रही थी।
सोमवार को एसआईटी ने सहायक समाज कल्याण अधिकारी सोम प्रकाश पुत्र फग्गन सिंह निवासी पीठ विहार गणेशपुर रूड़की, मुनीश त्यागी पुत्र सगवा निवासी विनीत नगर गली नंबर तीन पनियाला रोड गंगनहर और विनोद कुमार नैथानी पुत्र रमेश चंद्र निवासी डोभालवाला देहरादून को पूछताछ के लिए बुलाया।
एसआईटी ने उनसे जब छात्रों के फर्जी भौतिक सत्यापन करने के संबंध में सवाल दागे तब वह जवाब नहीं दे पाए। कई घंटों तक एसआईटी की पूछताछ जारी रही। एसआईटी की मानें तो इन सभी ने ऐसे छात्रों का सत्यापन किया, जो न तो कभी कॉलेज गए थे और न ही उन्होंने परीक्षा दी थी।
संतोषजनक जवाब न मिलने पर एसआईटी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। एसआईटी के विवेचनाधिकारी आयुष अग्रवाल ने बताया कि सोम प्रकाश फिलहाल सहायक समाज कल्याण अधिकारी भगवानपुर ब्लॉक के तौर पर कार्यरत है, बाकी दो सेवानिवृत्त हो चुके है। यह उस वक्त यहां तैनात थे, जब घोटाला किया गया था।