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उत्तराखंड की ग्राम पंचायतों में सात करोड़ का ब्याज घोटाला

Sat, 01 Sep 2018 11:34 AM IST
महेंद्र प्रताप, अमर उजाला, देहरादून
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घोटाला - फोटो : amar ujala
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सूबे की ग्राम पंचायतों में सात करोड़ रुपये का ब्याज घोटाला सामने आया है। ऑडिट रिपोर्ट के हिसाब से पंचायतों के खातों में विकास कार्यों का जो बजट आया, उसका पूरा ब्याज पंचायतें हजम कर गईं। पंचायतों को जारी होने वाले सरकारी धन के दुरुपयोग का यह खुलासा वित्त विभाग की ताजा ऑडिट रिपोर्ट में हुआ है। 

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केंद्र सरकार की ओर से 14वें वित्त आयोग और प्रदेश सरकार राज्य वित्त आयोग से हर साल पंचायतों को विकास कार्यों के लिए करोड़ों का बजट जारी किया जाता है। हाल ही में वित्त विभाग की ओर से किए ऑडिट में पौड़ी गढ़वाल, चमोली, हरिद्वार, टिहरी, देहरादून, रुद्रप्रयाग, ऊधमसिंह नगर, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, बागेश्वर, चंपावत, अल्मोड़ा सहित सूबे के सभी जिलों की पंचायतों में (2011-12 से 2015-16) पांच सालों के भीतर हुए कार्यों की पड़ताल हुई। इसमें 90 फीसदी पंचायतें घपलों में घिरी पाई गईं और करोड़ों का हेरफेर सामने आया। 

राजकोष में जमा होना चाहिए ब्याज का पैसा
बताते चलें कि पंचायतों के खाते में विकास का जो बजट जमा होता है, उस पर बैंक से ब्याज भी मिलता है। पंचायतों ने इस ब्याज को राजकोष में जमा करने की बजाए निजी धन की तरह निकाला और मनमाना उपयोग कर लिया। नियम के अनुसार ब्याज से मिला यह धन राजकोष में जमा होना चाहिए। फिलहाल ऐसा नहीं हो पाया। पूरे प्रकरण पर सचिव पंचायती राज विभाग पंकज पांडेय का कहना है कि अभी मेरे पास ऑडिट रिपोर्ट नहीं आई है। रिपोर्ट की संस्तुति पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 
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कैसे जारी होता है बजट
प्रदेश में कुल 7969 ग्राम पंचायतें हैं। इनके विकास के लिए केंद्र की ओर से 14वें और और राज्य की ओर से चौथे वित्त आयोग की सिफारिशों के मुताबिक विकास निधि जारी की जाती है। यह राशि पहले पंचायती राज निदेशालय को आवंटित किया जाता है। वित्त विभाग इस राशि को पंचायती राज विभाग को स्थानांतरित करता है। इसके बाद समय-समय पर ग्राम पंचायतों की मांग और जिला पंचायतों के प्रस्ताव पर यह विकास निधि प्रोजेक्ट के हिसाब से ग्राम पंचायतों के  खाते में स्थानांतरित की जाती है। खास बात यह है कि जिलाधिकारी और सांसद भी गांवों के विकास के लिए मांग के अनुरूप ग्राम पंचायतों के खाते में विकास के लिए पैसा ट्रांसफर करते हैं। बैंकों में जमा इस राशि से जो ब्याज मिलता है उसे वापस ट्रेजरी चालान के जरिए राजकोष में जमा करना होता है। ग्राम पंचायतों का बैंक खाता ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी के संयुक्त हस्ताक्षर से संचालित होता है। 

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