उत्तराखंड परिवहन निगम पर ईपीएफ में लाखों का घोटाला करने आरोप लगाया गया है।
कर्मचारियों का आरोप है 2010 के बाद की ईपीएफ धनराशि का निगम प्रबंधन और एजेंसी संचालकों ने गबन कर लिया है। आरोप यह भी है कि सिक्योरिटी की मद में एजेंसी कर्मियों से जमा की गई दो करोड़ रुपए की धनराशि निगम कोष में जमा नहीं की गई है। यह धनराशि कहां है, किसी को नहीं पता।
आरटीआई के तहत मिली जानकारी
उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन को यह जानकारी आरटीआई के तहत मिली है। इस मामले को लेकर मंगलवार को आईएसबीटी में कर्मचारी यूनियन की राज्य स्तरीय आम सभा हुई। प्रांतीय महामंत्री अशोक कुमार ने कहा कि नियुक्ति से पहले एजेंसी कर्मियों से जो सिक्योरिटी राशि वसूली गई, उसकी रसीद नहीं दी गई।
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पूर्व में एजेंसी संचालक द्वारा किलोमीटर बिलों में भी लगभग पचास हजार रुपये की हेरी-फेरी की जा चुकी है। वहीं प्रति किमी आठ पैसे कर्मियों का ईपीएफ कटता है, लेकिन लाखों रुपए की इस राशि का कोई हिसाब किताब नहीं है। आम सभा में विशेषकर चार बिंदुओं पर चर्चा हुई।
प्रबंधन थोप रहा शर्तें
यूनियन अध्यक्ष एचआर बहुगुणा ने कहा कि संविदा कर्मियों को नियमित नियुक्ति देने में प्रबंधन ऐसी शर्तें थोप रहा है, जिससे सभी कर्मी खुद ही अयोग्य हो जाएं। प्रबंधन 350 पदों पर केवल 40 कर्मचारियों को ही नियुक्ति दे रहा है। मृतक आश्रितों के साथ भी यही खेल हो रहा है।
सभा में टनकपुर मंडल से क्षेत्रीय अध्यक्ष रामशरण दद्दा, क्षेत्रीय मंत्री सुधीर कुमार, कुमाऊं मंडल से क्षेत्रीय अध्यक्ष दीवान सिंह रावत, मंत्री शमीम अहमद, शाखा अध्यक्ष कमल पपनै, देहरादून मंडल से क्षेत्रीय अध्यक्ष उदयवीर सिंह, क्षेत्रीय मंत्री केपी सिंह, शाखा अध्यक्ष देवेंद्र मान, मंत्री हरेंद्र कुमार, परमजीत सिंह आदि मौजूद रहे।
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