उत्तराखंड पुलिस को सरकार की प्रतिष्ठा की भी परवाह नहीं है। सरकार की साख से जुड़े टीडीसी (तराई बीज विकास निगम) घोटाले की विवेचना कर रहे जांच अधिकारी को ऐसी स्थिति में रुद्रप्रयाग ट्रांसफर कर दिया गया जब जांच अस्सी प्रतिशत पूरी हो चुकी है।
नियुक्ति और बोरा खरीद गड़बड़ी
इस बात की भनक ना तो शासन को है और ना ही मुख्यमंत्री को। बहुगुणा सरकार द्वारा गठित भाटी जांच आयोग ने टीडीसी के अध्यक्ष पद पर हेमंत द्विवेदी की नियुक्ति और बोरा खरीद गड़बड़ी पाई थी।
इसके बाद शहर कोतवाली में शासन की तरफ से मुकदमा कायम कराकर पुलिस के वरिष्ठ उप-निरीक्षक निर्विकार सिंह को विवेचना अधिकारी नियुक्त किया। निर्विकार को प्रदेश पुलिस में बेहतर जांच अधिकारियो में गिने जाते हैं।
इन्होंने ही रुड़की में डिप्टी जेलर हत्याकांड की जांच की थी। इसी आधार सरकार की प्रतिष्ठा से जुड़ी यह जांच उन्हें दी गई। वह इस समय केवल इसी जांच का काम देख रहे थे। सूत्र बताते हैं कि जांच का काम अस्सी प्रतिशत पूरा होने पर निर्विकार सिंह को रुद्रप्रयाग ट्रांसफर किया गया।
तत्काल रिलीव करने के लिए कहा
डीआईजी गढ़वाल के कार्यालय से जारी तबादला आदेश में तत्काल रिलीव करने के लिए भी कहा गया। यह मामला केवल एक पुलिस अफसर के तबादले का ही नहीं है।
बल्कि उस जांच को भी बाधित करना है जो विपक्ष के खिलाफ सरकार के पास एक मजबूत हथियार है। यह तबादला इसलिए भी सामान्य नहीं है क्योंकि इस मामले में कोई भी अधिकारी कुछ भी बोलने से बच रहा है।
सूत्र बता रहे हैं कि टीडीसी की जांच कर रहे इस विवेचना अधिकारी का तबादला पीएचक्यू के दबाव में किया गया है। लेकिन फिलहाल इस तबादले को पुलिस विभाग के रवैये पर सवाल उठ रहे हैं।