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मनरेगा के सोशल ऑडिट में खुले ऐसे घपले कि भौचक्की रह गई सरकार

Tue, 05 Jun 2018 01:00 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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फाइल फोटो - फोटो : social media
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केंद्र की महत्वाकांक्षी मनरेगा योजना के तहत ग्राम पंचायतों में होने वाले विकास कार्यों में घपलों की परतें खुल रही हैं। पंचायतों ने बिना काम कराए ही हजारों रुपये का भुगतान कर दिया।

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बिलों में निर्माण कार्यों के लिए सीमेंट, रेत, बजरी, सरिया क्रय को दर्शाया गया। लेकिन कार्यों का भौतिक सत्यापन करने पर न तो सीमेंट लगा है और न सरिया। निर्माण सामग्री के नाम पर मनरेगा के पैसे का गोलमाल किया गया।

मनरेगा के सोशल आडिट में इसका खुलासा हुआ है। उत्तराखंड सामाजिक अंकेक्षण जवाबदेही एवं पारदर्शिता अभिकरण की ओर से रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, पौड़ी गढ़वाल, पिथौरागढ़ जिले की 39 ग्राम पंचायतों की ऑडिट रिपोर्ट केंद्र व प्रदेश सरकार को सौंप दी गई है।

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39 पंचायतों में मनरेगा कार्यों का किया सोशल आडिट

शौचालय - फोटो : Amar Ujala
सरकार की ओर से पहली बार मनरेगा कार्यों का आडिट कराने से ग्राम पंचायतों में बड़ी वित्तीय अनियमितताएं सामने आ रही हैं। उत्तराखंड सामाजिक अंकेक्षण जवाबदेही एवं पारदर्शिता अभिकरण (उसाटा) ने अप्रैल व मई माह में उत्तरकाशी जिले के नौगांव, रुद्रप्रयाग के जखोली, पौड़ी गढ़वाल के नैनीडांडा, पिथौरागढ़ के धारचूला विकासखंड की 39 पंचायतों में मनरेगा कार्यों का सोशल आडिट किया।

नौगांव ब्लाक के पौंटी पंचायत में आठ शौचालय निर्माण के लिए मनरेगा से 96 हजार रुपये का भुगतान किया गया। भौतिक सत्यापन में एक भी शौचालय नहीं मिला। इसके साथ ही तीन कार्ययोजना में सुरक्षा दीवार के लिए माप पुस्तिका में 9.5 लाख रुपये का दर्शाया गया। लेकिन आडिट टीम को मौके पर कोई काम नहीं मिला।

नैनीडांडा के भौन पंचायत में गौशाला व बकरी बाड़ा बनाने के लिए 125 सीमेंट बैग के साथ रेत, सरिया का क्रय दर्शाया गया। जबकि गौशाला व बकरी बाड़ा में सीमेंट व सरिया का प्रयोग नहीं हुआ। कागजों में निर्माण सामग्री क्रय कर हजारों रुपये का गोलमाल सामने आया है। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार कई पंचायतों में मनरेगा कार्यों के बिलों को ग्राम प्रधान व ग्राम विकास अधिकारी के हस्ताक्षर बिना ही स्वीकृत किया गया। मस्टरोल में फ्ल्यूड लगाकर ओवर राइटिंग की गई। मनरेगा कार्यों के रिकॉर्ड में भी बड़ी गड़बड़ी पाई गई।
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कार्य की पेमेंट पूरी, लेकिन काम अभी भी अधूरा

केस नंबर-एक
पौड़ी के नैनीडांडा ब्लाक भौन पंचायत में खेल मैदान व चेकडैम के लिए अलग-अलग वर्क ऑर्डर जारी किए गए। जिसमें खेल मैदान की लंबाई 146 मीटर थी। लेकिन मौके पर खेल मैदान 80 मीटर लंबा बनाया गया। मैदान के साथ ही चेक डैम बनाया गया। जिसका काम अधूरा पड़ा है। जबकि कार्य की पेमेंट कर दी गई। 

केस नंबर-दो
पौंटी व बकरोटी ग्राम पंचायत में एक ही व्यक्ति के नाम से दो-दो जॉब कार्ड जारी किए गए। पौंटी में विनोद कुमार व बकरोटी पंचायत में मनोहर लाल के नाम से दो-दो जॉब कार्ड बनाए गए। 

केस नंबर-तीन
रुद्रप्रयाग के जखोली ब्लाक की कांडा पंचायत में प्रधान व ग्राम विकास अधिकारी के हस्ताक्षर के बिना ही मनरेगा कार्यों का एक लाख 19 हजार रुपये का भुगतान किया गया। पंचायत में मनरेगा कार्यों की निगरानी के लिए समिति का गठन किया गया। 

केस नंबर-चार 
जखोली ब्लाक के जाखाल पंचायत में मनरेगा के तहत करीब 35 हजार से 30 मीटर खेत समतल व सुरक्षा दीवार के कार्यों को दर्शाया गया। जबकि मौके पर 7.5 मीटर ही काम हुआ। वहीं वर्मी कम्पोस्ट योजना का काम भी मौके पर नहीं मिला।

ग्राम पंचायत में मनरेगा कार्यों की सोशल ऑडिट रिपोर्ट मिली है। जिसे आगामी कार्रवाई के लिए प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास विभाग को सौंपी गई है। प्रदेश की सभी पंचायतों में मनरेगा का आडिट कराया जा रहा है। अब तक 206 पंचायतों में ऑडिट हो चुका है।
- राम बिलास यादव, अपर सचिव
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