दसवीं से ऊपर की कक्षाओं में पढ़ रहे राज्य के करीब 25 हजार अनुसूचित जाति के छात्रों को केंद्र सरकार से छात्रवृत्ति योजना में बड़ी राहत मिलने जा रही है। यह राहत राज्य सरकार के लिए भी होगी, क्योंकि उसे खुद से योजना का 60 फीसदी खर्च नहीं करना होगा। यह खर्च केंद्र सरकार उठाएगी।
दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना में एससी छात्रों पर खर्च होने वाली छात्रवृत्ति मद में राज्य को केंद्र से अभी तक एक पाई नहीं मिल रही है, लेकिन नई योजना के तहत राज्य को सालाना करीब 28 करोड़ रुपये मिलेंगे। यह धनराशि प्रत्यक्ष नकद अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से सीधे पात्र अनुसूचित जाति वर्ग के छात्रों के खाते में जाएगी।
निदेशक समाज कल्याण विनोद गिरी गोस्वामी के अनुसार, पिछले तीन वर्ष के खर्च का औसत निकालकर 60 फीसदी खर्च की राशि करीब 28 करोड़ बैठ रही है। यह खर्च औसतन करीब 46.66 करोड़ है।
पिछले महीने मोदी सरकार ने की थी योजना की घोषणा
मोदी सरकार ने पिछले महीने अनुसूचित जातियों के छात्रों के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति में बड़े परिवर्तन को मंजूरी दी थी। कैबिनेट के फैसले के बाद केंद्रीय सामाजिक न्याय आधिकारिता विभाग की ओर से राज्य सरकारों को योजना के तहत कार्रवाई करने के दिशा-निर्देश जारी हो गए थे। प्रदेश सरकार के समाज कल्याण विभाग ने योजना के तहत अपना होमवर्क पूरा कर लिया है।
अभी नहीं मिल रही है धनराशि
राज्य सरकार को दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना में पिछले कुछ वर्षों में कोई धनराशि प्राप्त नहीं हो पा रही है। यह धनराशि वचनबद्ध देयता को खर्च करने के बाद ही प्राप्त होनी है, लेकिन विभिन्न कारणों से वचनबद्धता धनराशि जो करीब 111 करोड़ है, खर्च नहीं हो पाई। लेकिन, केंद्र की नई योजना के तहत पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति में एससी छात्रों पर जितनी धनराशि राज्य सरकार खर्च करेगी, उसका 60 फीसदी केंद्र सरकार वहन करेगी।
केंद्र सरकार ने एससी छात्रों के लिए पोस्ट मैट्रिक योजना शुरू की है। विभागीय स्तर पर इसकी तैयारी कर ली गई है। योजना से राज्य को 28 करोड़ रुपये की धनराशि प्राप्त होने का अनुमान है। अभी तक वर्षों में हमें इस मद में कोई धनराशि प्राप्त नहीं हो रही है।
-विनोद गिरी गोस्वामी, निदेशक, समाज कल्याण