श्रावण माह की शिवरात्रि पर रात बारह बजते ही मंदिर भोले बाबा के जयकारों से गूंज उठे। रविवार रात्रि मंदिरों की ओर से किए जाने वाले बाबा के अभिषेक के पश्चात कांवड़ियों ने जल चढ़ाना शुरू किया। सोमवार को सभी जगह भोले बाबा का अलग-अलग शृंगार किया जाएगा।
सोमवार की वजह से इस बार शिवरात्रि का महत्व बढ़ गया है। माना जा रहा है कि इस दिन भोले बाबा का पूजन करने से वह शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं और भक्तों की मनोकामना पूर्ण करते हैं। शिवरात्रि के मौके पर टपकेश्वर मंदिर में रविवार रात 11 बजे से ही भक्तों की लंबी लाइन लग गई थी। 12 बजे मंदिर के कपाट खोले गए।
इसके साथ ही सबसे पहले कांवड़ियों ने जल चढ़ाना शुरू किया। मंदिर के महंत कृष्णा गिरी ने बताया कि सोमवार को शिवरात्रि के मौके पर बाबा का देवेश्वर स्वरूप में शृंगार किया जाएगा। इसके साथ ही भंडारे का आयोजन होगा। बताया कि कांवड़ियों के लिए रहने-खाने की विशेष व्यवस्था की गई है।
सहारनपुर चौक स्थित श्री पृथ्वीनाथ मंदिर में सुबह से ही बाबा को जल चढ़ने लगा। मंदिर के सेवादार संजय गर्ग ने बताया कि शिवरात्रि पर किया जाने वाला बाबा का अभिषेक माता-पिता एवं बुजुर्गों को समर्पित होगा। बताया कि इसके लिए हरिद्वार से गंगाजल लाया गया है। इसके साथ ही वट वृक्ष की जटाओं एवं सब्जियों से बाबा का शृंगार किया जाएगा।
हरियाली का संदेश भी दिया जाएगा। पंचायती मंदिर में शिवरात्रि के मौके पर बाबा का विशेष अभिषेक और आरती होगी। कालिका भवन में भोले बाबा की विशेष आरती की जाएगी। श्री श्याम सुंदर मंदिर में भोले बाबा का अभिषेक होगा। इसके साथ ही गीता भवन, प्राचीन शिव मंदिर आदि सभी में बाबा की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी।
श्रद्धालुओं के लिए अनाउंसमेंट
शिवरात्रि के मौके पर अक्सर श्रद्धालु टपकेश्वर स्थित तमसा नदी के समीप पहुंच जाते हैं। जहां सावन के महीने में पानी अधिक रहता है और लोग तेज बहाव के साथ बह सकते हैं। ऐसे में नदी किनारे उनके लिए फोटो खिचवाना या पानी पर जाना खतरनाक हो सकता है। इसीलिए टपकेश्वर मंदिर प्रबंधन की ओर से इस बार अनाउंसमेंट की व्यवस्था की गई है। इसके माध्यम से लगातार श्रद्धालुओं से नदी से दूर रहने की अपील की जाएगी। इसके साथ ही लाइन में लगने, व्यवस्था बनाने आदि की अपील भी की जाएगी।