राजधानी में महिला हेल्पलाइन और वूमेन प्रोटेक्शन सेल बने तो महिलाओं की मदद के लिए थे, लेकिन महिलाओं से ज्यादा पुरुष यहां अपनी शिकायतें दर्ज करा रहे हैं।
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किसी को अपनी गर्लफ्रेंड से प्रॉब्लम है तो कोई अपनी पत्नी से परेशान है। स्थिति यह है कि हर तीन में एक कॉल किसी पति या ब्वॉयफ्रेंड की होती है। वूमन प्रोटेक्शन सेल की प्रभारी ममता गोला ने बताया ऐसी शिकायतों को थानों में ही ट्रांसफर कर दिया जाता है।
केस 1
मैडम, मुझे अब अपनी गर्लफ्रेंड के साथ नहीं रहना। इसने मेरी लाइफ नर्क बना दी है। रोज-रोज की लड़ाई से मैं परेशान हो गया हूं। न पढ़ाई में मन लग रहा है न किसी और काम में। शादी के लिए वह मेरे पीछे ही पड़ गई है। मुझे बचाइये प्लीज।
केस 2
मैडम, जनवरी में मेरी शादी हुई थी। कुछ दिन साथ रहने के बाद मेरी पत्नी गायब हो गई। बाद में पता चला कि वह अपने प्रेमी संग भाग गई है। उसके परिजनों से शिकायत की तो वे मुझ पर ही भड़क उठे। कहने लगे कि तुझे दहेज के केस में फंसा देंगे। मुझे बचाइये।
केस 3
(लड़का रोते हुए) मैं अपनी गर्लफ्रेंड से शादी नहीं करना चाहता। हम दोनों रिलेशनशिप में सात साल तक रहे। अब वह मुझे पसंद नहीं। वह बहुत डोमिनेटिंग है। वह आपको कॉल करती, इसलिए एहतियातन मैंने पहले कॉल किया है। आप पहले मेरी शिकायत दर्ज कीजिए।
अपने ही तोड़ रहे विश्वास
महिला सिक्योरिटी/साइबर सेल में हर दिन अश्लील एसएमएस की छह से दस शिकायतें दर्ज हो रही हैं। ज्यादातर मामलों में आरोपी कोई रिश्तेदार या दोस्त ही निकलता है।
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हालांकि, शिकायतों के मुकाबले दर्ज मुकदमों की संख्या कम है। साइबर सेल प्रभारी के अनुसार कई शिकायतें वापस हो जाती हैं या फिर समझौता हो जाता है। ऐसे मामलों में नंबरों की आईडी निकाल कर आईटी एक्ट में मुकदमा दर्ज कराया जाता है।
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