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तेंदुए को हराने वाली को मात दे रही है जिंदगी

Wed, 09 Apr 2014 04:36 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
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महज 11 साल की उम्र में तेंदुए का सामना करने के बाद मां-पिता और भाई-बहनों की जिम्मेदारी उठा रही कमला (25) आज मुफलिसी के दिन काट रही है।
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नर्स के तौर पर दिन रात दूसरों की सेवा की। मगर परिवार पालने के लिए अजीविका जुटाने के मौके हाथों से छिटकते गए। आज स्थाई काम की तलाश के साथ वह खुद भी बीए के पेपर दे रही है।

कमला की कहानी
अल्मोड़ा के धौलछीना की रहने वाली कमला पर बचपन में घास काटते समय जंगल में तेंदुए ने हमला बोल दिया था। होश में रहने तक कमला पाठल से तेंदुए से जूझती रही। बेहोश होने के बाद तेंदुआ उसे घने जंगल में खींच ले गया।
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हमले से उसके चेहरे, पैर और आंख पर घाव हो गया। बचने के बाद कमला को कई दिनों तक बैसाखी के सहारे चलना पड़ा। कुछ ठीक होने पर किसी की सलाह पर वह दून चेशायर होम पहुंची।

यहां से उसका इलाज जौलीग्रांट अस्पताल में कराया गया। चेहरे की सर्जरी में लाखों रुपये खर्च हुए। कमला ने बताया कि मैंने आठवीं से इंटर तक की पढ़ाई भी यहीं की। नर्स की ट्रेनिंग भी चैशायर होम से मिली।

नौकरी की इच्छा जताई
इस बीच मां का फोन आया कि गांव में बारिश से मकान ढह गया। हम सुरक्षित नहीं हैं। मैंने चैशायर होम की अधीक्षिका से नौकरी की इच्छा जताई।

उन्होंने कहा कि इसके लिए तुम्हें बाहर रहना होगा। मैंने सहस्त्रधारा रोड पर कमरा लिया और पिता, भाई सभी को बुला लिया। खुद लोगों के घरों पर नर्स की तरह का काम करने लगी। पापा की नौकरी सिक्योरिटी गार्ड के तौर पर एक कंपनी में लगवा दी।

भाइयों को भी इंटर में यहीं दाखिला दिला दिया। मरीज ठीक हो गए और मेरा काम भी उन घरों पर खत्म हो गया। कॉल सेंटर में जॉब करनी चाही, लेकिन हेड फोन लगाने पर कान से खून आने लगा।
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कमला बताती हैं, एमकेपी कॉलेज से बीए फाइनल इयर कर रही हूं। इन दिनों पेपर चल रहे हैं, लेकिन चिंता है तो परिवार की। परिवार के भरण-पोषण के लिए नौकरी की जरूरत है। वह चाहती है कि उसे कोई ऐसा स्थाई काम मिल सके, जिससे वह भाइयों को बेहतर भविष्य दे सके।
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