सब्जी की ठेली लगाकर किसी तरह घर की गुजर-बसर करने वाले ज्ञान चंद शर्मा की बेटी ने न केवल अपनी मेधा से परिवार का नाम रोशन किया, बल्कि कई अन्य बालिकाओं को मुफ्त शिक्षा देकर उनके जीवन की राह सुगम बना रही है।
फूलचंद नारी शिल्प मंदिर इंटर कालेज से 12वीं पास करने वाली रीनू पढ़ाई में शुरू से अच्छी रही। इसी का परिणाम था कि जब 2008 में उसका 12वीं का नतीजा आया तो उत्तराखंड बोर्ड में प्रदेश में वह 20वें स्थान पर रही। दून जिले में वह दूसरे पायदान पर थी।
12वीं तो हुई, लेकिन आगे की राह आसान नहीं थी। पिता का सपना था कि रीनू इंजीनियरिंग करे, लेकिन इतना पैसा पास नहीं था। ऐसे में बैंक से तीन लाख रुपए कर्ज लिया गया। देवभूमि इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलाजी (डीबीआईटी) से उसने इंजीनियरिंग शुरू कर दी। कुछ माह पहले ही इलेक्ट्रिकल/इलेक्ट्रोनिक्स में उसे बीटेक की डिग्री हासिल हो गई।
एक निजी संस्था की मदद से और पढ़ाई के दौरान मिली स्कालरशिप से रीनू ने बैंक का तकरीबन एक लाख रुपया वापस कर दिया। अभी दो लाख बाकी है। उसके पास आफर हैं, लेकिन अभी नौकरी इसलिए नहीं पकड़ रहीं, क्योंकि जिन बच्चियों को पढ़ा रही थी उनके इम्तहान आगे हैं।
दूसरे, मां चाहती हैं कि बिटिया ने पिता का सपना इंजीनियर बनकर पूरा किया है तो सरकारी अफसर बन उनके भी ख्वाब में रंग भरे। रीनू इसके लिए भी प्रयास कर रही है। पिता भी बेटी के फैसले का सम्मान करते हुए फिलहाल उस पर नौकरी के लिए दबाव नहीं डाल रहे। वह उन उपलब्धियों से खुश हैं, जो महज 8वीं पास सब्जी वाले की बेटी के रूप में रीनू ने अब तक हासिल की हैं।
ऊखीमठ से निकल उड़ा रही प्लेन
रुद्रप्रयाग के ऊखीमठ गांव में जन्मी बरखा आज प्लेन उड़ा रही है। बरखा ने खुद को ऐसे समय में साबित किया जबकि एविएशन के क्षेत्र में मंदी का दौर था। लोग निकाले जा रहे थे। बरखा तब अपना साक्षात्कार दे चुकी थी।
नियुक्ति के लिए उन्हें तीन साल इंतजार करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। सिर्फ अपने लक्ष्य पर नजर टिकाए इंतजार करती रही। अब इस बरखा पर माता-पिता के साथ ही ससुराल वालों को भी खूब नाज है।
वर्ष 1981 में बरखा चौधरी का जन्म ऊखीमठ में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा पहाड़ से करने के बाद पिता के तबादले के साथ ही इनका परिवार दून शिफ्ट हो गया। ग्यारहवीं, बारहवीं की पढ़ाई उसने दून स्थित मार्शल स्कूल से की।
इसके बाद दो साल तक दिल्ली से एयर होस्टेज का कोर्स किया। फिर किंगफिशर में दो साल बतौर एयरहोस्टेज नौकरी भी की, लेकिन बरखा का सपना तो कुछ और ही था।
अमेरिका के फ्रैसनो से किया पायलेट का कोर्स
वह चाहती थी कि वह एयरहोस्टेज बनकर ना रहे बल्कि प्लेन उड़ाए। यही वजह है कि घरवालों के सहयोग से उसने बैंक से लोन लिया और अमेरिका के फ्रैसनो से पायलेट का कोर्स किया। इसके साथ ही दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीए की डिग्री हासिल की।
इसके बाद बरखा ने स्पेन से इंडिगो एयरवेज के सहयोग से एविएशन का लाइसेंस प्राप्त करने के लिए कोर्स किया। लाइसेंस प्राप्त कर बरखा इंडिगो एयर लाइंस में एयर बस उड़ा रही है। शादी के बाद भी बरखा पॉयलेट और घर दोनों जगह बखूबी अपनी भूमिका निभा रही है।
सहस्त्रधारा रोड के गोविंद नगर में स्थित बरखा के पिता सत्यवीर सिंह ने बताया कि बरखा का ससुराल डोईवाला में है। बताया कि बरखा का बड़ा भाई विशाल गाजियाबाद में काम करता है। वहीं बड़ी बहन सारिका की शादी हो गई है।
सबसे छोटी होने के बावजूद बरखा में शुरू से ही कुछ कर गुजरने की लग्न रही है, जिसे उसने साबित भी कर दिया है। बताया कि लोक निर्माण विभाग में कनिष्ठ अभियंता के पद से रिटायर्ड हूं। जिस जगह से बेटी ने इतनी ऊंची उड़ान भरी है, देखकर बेहद गर्व महसूस करता हूं।