उत्तराखंड कांग्रेस में उठापटक का दौर जारी है। पौड़ी से सांसद सतपाल महाराज ने कांग्रेस से इस्तीफा देकर बीजेपी का दामन थाम लिया है।
शुक्रवार को दिल्ली में सतपाल महाराज ने इस्तीफा देने के बाद राजनाथ सिंह से मिलकर बीजेपी में शामिल होने की औपचारिकता पूरी की।
बीजेपी में शामिल होने के बाद सतपाल महाराज ने राजनाथ सिंह का धन्यवाद करते हुए कहा कि जिस तरह से राजसूय यज्ञ हुआ था और उसमे भगवान कृष्ण ने जूठे पत्तल उठाने की भूमिका निभाई थी वैसी ही भूमिका निभाने बीजेपी में आया हूं।
खतरे में उत्तराखंड सरकार
सतपाल महराज के इस्तीफा देने का सीधा असर प्रदेश की सरकार पर पड़ेगा। सरकार में उनकी मंत्री पत्नी अमृता रावत के अलावा करीब आधा दर्जन विधायक सीधे तौर पर सतपाल महराज के करीबी बताए जाते हैं।
वहीं सहयोगी दल पीडीएफ के नेता मंत्री प्रसाद नैथानी से उनकी नजदीकियां भी सीएम की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं। हरीश रावत के नेता चुने जाने के समय सतपाल महराज और उनके समर्थक विधायकों ने जमकर हंगामा किया था।
रावत से मनमुटाव जगजाहिर
अभी पिछले महीने हरीश रावत जब श्रीनगर में आए तो सतपाल महाराज पर व्यंग्य करने से नहीं चूके।
स्वागत के दौरान जब हरीश रावत ने डा. हरक सिंह रावत को एक गुलाब भेंट किया, तो हरक पूछ बैठे कि गुलाब तो दिया, लेकिन क्या इसके कांटे हटा लिए हैं।
जवाब में मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में हरक सिंह को संबोधित करते हुए कहा कि हम सबको मिलकर दूसरों की राह के कांटों को हटाना है। इस प्रदेश के गांवों को संवारना है। इसलिए मैंने तो कांटे पहले ही हटा रखे हैं।
इसी तरह, महाराज को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराज हमें सहयोग तो देते हैं, पर आशीर्वाद नहीं देते। हमें उनके आशीर्वाद की भी जरूरत है।