दोस्ती आखिर काम आई। कांग्रेस के अपमानजनक माहौल से सतपाल महाराज को मुक्ति दिलाने के लिए उनके पुराने दोस्त सत्य नारायण जटिया ने अहम किरदार निभाया। अटल सरकार में केंद्रीय कपड़ा मंत्री रहे सत्य नारायण जटिया को भाजपा शीर्ष नेतृत्व और आरएसएस के काफी करीब माना जाता है।
सत्यनारायण जटिया व सतपाल महाराज काफी पुराने मित्र हैं। करीब सप्ताह भर पहले सांसद सतपाल महाराज ने दिल्ली में जटिया से मुलाकात की। इसी बैठक में महाराज के भाजपा में जाने की पृष्ठभूमि तैयार हो गई।
किसी को नहीं लगी भनक
यह ऑपरेशन इतने गुपचुप तरीके से चला कि ना कांग्रेसियों को पता चला और ना ही भाजपा को खबर रही। इसके बाद जटिया ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह व राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) रामलाल को उत्तराखंड कांग्रेस की परिस्थितियों से अवगत कराया।
जटिया की मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ के जनजातीय इलाकों में गजब की पकड़ है इसलिए भाजपा हाईकमान ने उनकी बात को गंभीरता से लिया। बीती रात्रि में जब सब कुछ फाइनल हो गया तब शुक्रवार की सुबह उत्तराखंड भाजपा नेतृत्व को महाराज के पार्टी में शामिल होने की खबर दी गई।
सोनिया से नहीं मिल पाए महाराज
विगत गुरुवार जब महाराज दिल्ली पहुंचे तो उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की लेकिन देर तक किए गए प्रयास के बावजूद कुछ कांग्रेसी सूरमाओं ने ही मुलाकात का वक्त तय नहीं होने दिया।
कई मौकों पर हुए अपमानित
दरअसल, महाराज को हरीश के मुख्यमंत्री बनने के बाद कई मौकों पर अपमान महसूस हुआ। चार मार्च को उस समय तो हद हो गई जब कैबिनेट मंत्री अमृता रावत सचिवालय में रात्रि करीब साढ़े दस बजे मुख्यमंत्री हरीश रावत से मिलने गए और उनकी मुलाकात आधी रात के बाद लगभग डेढ़ बजे हुई। अमृता इंतजार करती रही और सीएम भीतर जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करते रहे।