धर्म के साथ-साथ राजनीति में दखल रखने वाले सतपाल महाराज की उत्तराखंड राज्य के गठन में अहम भूमिका रही है।
प्रदेश के गठन के सवाल को लेकर ही वो राजनीति में आए। कांग्रेस में रहे और एनडी तिवारी के साथ कांग्रेस (तिवारी) में भी रहे। पौड़ी गढ़वाल से सांसद रहे, केंद्र में मंत्री भी रहे, लेकिन दो साल पहले कांग्रेस में परिस्थितियां कुछ ऐसी बनीं कि महाराज को भाजपा का दामन थामना पड़ा।
भाजपा ने उनको राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य भी बनाया है। सतपाल महाराज को भाजपा में शामिल हुए दो साल से अधिक वक्त हो गया, लेकिन पार्टी ने उनको अभी तक कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं सौंपी है। ऐसा कहा जाता है कि फ्लोर टेस्ट के वक्त महाराज कांग्रेस और पीडीएफ में मौजूद अपने शिष्यों को भाजपा के पक्ष में खड़ा नहीं कर पाए थे।
अगर ऐसा हो गया होता तो प्रदेश का राजनीतिक परिदृश्य कुछ अलग होता। महाराज को कांग्रेस क्यों छोड़नी पड़ी? फ्लोर टेस्ट के वक्त उनके शिष्य भाजपा के पक्ष में क्यों नहीं खड़े हुए? भाजपा में वो अपना राजनीतिक भविष्य कैसा देखते हैं? इन्हीं सब सवालों को लेकर अमर उजाला संवाददाता कृष्णेंदु कुमार ने उनके साथ लंबी बातचीत की। उनके कुछ तीखे सवाल भी किए। उन्होंने जो जवाब दिए आप भी पढ़ें...
आपका धार्मिक कद इतना ऊंचा है। देश-दुनिया में आपके प्रशंसक हैं तो आपको राजनीति में आने की जरूरत क्यों महसूस हुई?
- मैंने बदरीनाथ से दिल्ली तक पदयात्रा की है। इसमें मैंने देखा कि राजनीति में आकर राज्य को बनाया जा सकता है। उत्तराखंड संघर्ष समिति के दो संयोजकों में से एक मैं भी रहा हूं। प्रदेश और देश के हित के लिए मैं राजनीति में आया। जब में केंद्र में रेल राज्यमंत्री बना तो मैं उत्तराखंड के लिए रेल प्रोजेक्ट लेकर आया।
ऐसी कौन सी वजह रही, जिसके चलते आपको कांग्रेस छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा?
- उत्तराखंड से केंद्र में एनडी तिवारी और ब्रह्मदत्त जी के बाद मैं मंत्री रहा। मैंने सोनिया जी और कांग्रेस के अन्य मित्रों से कहा कि मुझे वरिष्ठता के मुताबिक जिम्मेदारी दी जाए, तो उनका कहना था कि आप तो हिंदू फेस हो आपको मंत्री कैसे बनाएं? इसके बाद मेरी पत्नी भी अंबिका सोनी से मिली थीं। उन्होंने भी कहा था कि महाराज जी को कोई जिम्मेदारी सौंपी जाए, तो उनका जवाब भी यही था कि मैं हिंदू फेस हूं। जबकि कांग्रेस के जितने बड़े नेता हैं सब मेरे ही आशीर्वाद से जीतते थे। चाहे जितिन प्रसाद हो, गिरिजा व्यास हो या फिर कमलनाथ मैं सबके क्षेत्र में जाता था। जब मैंने देखा कि कांग्रेस के अंदर भेदभाव है, तो मैंने कांग्रेस को तिलांजलि देना ही बेहतर समझा। इस तरह का भेदभाव भाजपा में नहीं है।
भाजपा ने भी तो पिछले दो साल के दौरान एक तरह से आपको घर बैठा दिया है ?
- नहीं उनके दिमाग में कुछ होगा, कुछ सोच रहे होंगे। मुझे राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य भी बनाया। पार्टी नेता व्यस्त भी तो थे। पहले लोकसभा का चुनाव, फिर महाराष्ट्र और हरियाणा में चुनाव। सब जगह सरकार भी तो बनानी थी। मुझे तो हेलीकाप्टर और हवाई जहाज दे दिया था, मैं हर जगह गया भी। हमने आपने आप को पार्टी के लिए समर्पित कर दिया है। अब पार्टी सोचेगी मेरा उपयोग किस तरह से करना है।