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कैबिनेट मीटिंग में ही भिड़ गए महाराज और हरक, जानिए क्या हुआ इसके बाद

Thu, 13 Jul 2017 09:13 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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बुधवार को हुई उत्तराखंड कैब‌िनेट की बैठक में माहौल उस समय गरमा गया जब दो 'पुराने दुश्मन' फ‌िर एक बार आमने सामने आ गए। बैठक में वे दोनों के बीच तीखी नोंक-झोंक हो गई। आगे जान‌िए क्या हुआ...
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केदारनाथ विकास प्राधिकरण के गठन को लेकर पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज और वन मंत्री हरक सिंह रावत के बीच नोकझोंक हुई है।  कैबिनेट की बैठक समाप्त होने के बाद सचिवालय में यह चर्चा बुधवार को गरम रही। महाराज ने इससे दो टूक इंकार किया, मगर हरक ने इस मुद्दे पर मतभेद और सुझाव देने की बात स्वीकारी है।  

सूत्रों की माने तो कैबिनेट की बैठक में पर्यटन विभाग की ओर से केदारनाथ विकास प्राधिकरण में पदों के सृजन के प्रस्ताव पर जब चर्चा चल रही थी तो हरक सिंह रावत ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि केदारनाथ विकास प्राधिकरण के गठन का मतलब क्या है? इसी तर्ज पर बदरीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री, हरिद्वार और ऋषिकेश विकास प्राधिकरण का भी गठन करना पड़ेगा।
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विकास प्राधिकरणों के गठन से सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।  इसी बात पर दोनों की बीच गरमा-गरम बहस होने की बात कही जा रही है। पर्यटन मंत्री होने के नाते महाराज केदारनाथ विकास प्राधिकरण में पदों के सृजन के प्रस्ताव की पैरवी कर रहे थे। हालांकि कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को पारित कर दिया।  पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज और वन मंत्री हरक सिंह रावत के बीच छत्तीस का आंकड़ा उस वक्त से है, जब वो कांग्रेस में हुआ करते थे। 


-कैबिनेट की मीटिंग में हरक सिंह रावत  के साथ नोकझोंक की बात गलत है। उन्होंने तो केदारनाथ विकास प्राधिकरण में पदों के सृजन के प्रस्ताव का समर्थन किया था। इस तरह की अफवाह शरारती तत्व फैला रहे हैं।
सतपाल महाराज, पर्यटन मंत्री 

नोकझोंक जैसी स्थिति तो थी नहीं। बैठक में  मैंने सिर्फ अपना सुझाव दिया था कि इस तरह के प्राधिकरण सफेद हाथी साबित होते हैं। महाराज जी ने जब मुझे कहा कि इस प्रस्ताव को पास हो जाने दें तो मैंने इसका समर्थन किया था। बैठक तो इसलिए ही होती है कि उसमें सुझाव दिए जाएं। किसी मुद्दे पर दो व्यक्तियों की राय अलग हो सकती है। इसका मतलब नोकझोंक और तकरार तो नहीं है। 
हरक सिंह रावत, वन और पर्यावरण मंत्री 
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