रामगंगा बांध परियोजना और कार्बेट टाइगर रिजर्व/नेशनल पार्क के मुख्यालय कालागढ़ में सेटेलाइट फोन के प्रयोग का मामला प्रकाश में आने से यूपी और उत्तराखंड की सरकारी मशीनरी में हड़कंप मचा है। खुफिया एजेंसी इस मामले की पड़ताल में जुट गई है।
मामले की हो रही खुफिया जांच
कालागढ़ क्षेत्र में 18 फरवरी, 2015 को सेटेलाइट फोन का इस्तेमाल होने की जानकारी यूपी के खुफिया विभाग को लगी है। रामगंगा बांध परियोजना की सुरक्षा अधिकारी मधुलता शर्मा ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि इस मामले की खुफिया जांच चल रही है।
जांच के दौरान यह बात सामने आई कि इस फोन का प्रयोग वन क्षेत्र के निकट से हुआ जिसकी लोकेशन यूपी और उत्तराखंड की सीमा के आसपास जंगल क्षेत्र में मिली है। कालागढ़ के थानाध्यक्ष आरएस कठैत के अनुसार पुलिस विभाग भी अपने स्तर पर मामले की जांच कर रहा है।
वन विभाग को इस बारे में पत्र लिखा गया है। अधिकारियों का मानना है कि सेटेलाइट फोन का उपयोग करने वाला या तो कोई विदेशी पर्यटक हो सकता है, या फिर विदेश में नौकरी करने वाला कोई स्थानीय व्यक्ति। बिना अनुमति के इस फोन का उपयोग नहीं किया जा सकता है।
सेटेलाइट फोन के इस्तेमाल से वन विभाग भी अलर्ट हो गया है। जांच एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि कहीं इस क्षेत्र में कोई अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्कर तो सक्रिय नहीं हो गया। मामले को राष्ट्रविरोधी गतिविधियों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। अधिकारियों की मानें तो इससे पूर्व यूपी की सीमा में एक बार पहले भी सेटेलाइट फोन का इस्तेमाल हुआ था।
सेटेलाइट फोन के इस्तेमाल के लिए अनुमति जरूरी
रामगंगा बांध परियोजना की सुरक्षा अधिकारी मधुलता शर्मा ने बताया कि सेटेलाइट फोन का प्रयोग बिना अनुमति के नहीं किया जा सकता है। प्राकृतिक आपदा जैसी स्थिति में भी प्रशासन की अनुमति से ही इस फोन का इस्तेमाल किया जाता है।
सेटेलाइट फोन के माध्यम से संदेश, चित्र आदि किसी भी देश में आसानी से सीधे भेजे जाते हैं। यहां पर सेटेलाइट फोन का इस्तेमाल करते ही लखनऊ में इस बात का पता चल गया, तभी से खुफिया विभाग जांच में जुटा हुआ है।