जूनियर मास्टर शेफ के टॉप 6 में शामिल देहरादून के सार्थक भारद्वाज कुछ दिनों के लिए घर लौट आया है।
शो के दौरान सात मंजिला रेनबो केक बनाकर जजों का दिल और 50 हजार रुपए जीतने वाला सार्थक ‘छुट्टी’ का पूरा फायदा उठाना चाहता है। इन दिनों में वह मम्मी से कुछ गढ़वाली डिशें बनाना सीखेगा, जिन्हें अगले दौर में शो में पेश करने की उसकी तैयारी है।
आराम के लिए घर लौटा
सोमवार शाम साढ़े पांच बजे प्रेमनगर निवासी सार्थक दून रेलवे स्टेशन पर उतरा। छोटा भाई लक्ष्य और मां तृप्ति शर्मा उसके साथ थे। सार्थक ने बताया कि बिजी शेड्यूल से वक्त मिलने के बाद वह कुछ दिन आराम के लिए घर लौटा है। ऑडिशन के लिए जाते वक्त वह बहुत नर्वस था, लेकिन अब वह कई नई डिश बनाना सीख चुका है।
बताया कि पहले उसे इटैलियन फूड बनाना नहीं आता था, अब शेफ जो कहते हैं, फटाफट बना देता है। सार्थक ने बताया कि वह शेफ को उत्तराखंड की डिश का स्वाद चखाना चाहता है। हालांकि, अभी तक उसे ऐसा मौका नहीं मिला है।
इमेन्यूल बड़ा प्रतिद्वंद्वी
सार्थक ने बताया कि वह मुंबई के इमेन्यूल को सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी मानता है। बताया कि इमेन्यूल नई-नई डिशेज बनाता है और इनोवेशन करता है। हालांकि, सार्थक अब तक फ्लेवर-ए-आजम और शेफ हेड का खिताब जीत चुका है।
मां के साथ दुकान ही चलानी है
सार्थक स्कूल से लौटने के बाद प्रेमनगर में मैगी प्वाइंट नाम से दुकान चलाता है। बताया कि उसके आदर्श शेफ विकास हैं, वह भी बचपन में अपनी मां के साथ दुकान चलाते थे।
सार्थक ने बताया कि शो के विजेता को बीस लाख रुपए की स्कालरशिप मिलनी है, लेकिन वह अपना मैगी प्वाइंट ही चलाना चाहता है। सार्थक के पिता अतुल शर्मा का दो साल पहले बीमारी से निधन हो गया था। सार्थक की मां आशा कार्यकत्री हैं।
खूब हुआ स्वागत
नाना-नानी के साथ प्रेमनगर के लोग सार्थक का स्वागत करने स्टेशन पर जुटे हुए थे। लोगों ने सार्थक को ट्रेन से उतरते ही गोद में उठा लिया। उसकी जीत के लिए नारेबाजी की और मिठाई बांटी गई।
जितेंद्र तनेजा, रवि सूरी, योगेंद्र चौहान, राजपाल तोमर, प्रदीप, जगन सूरी, जयकिशन भाटिया, शुभम मौजूद रहे। सार्थक और उनकी मां ने जितेंद्र तनेजा का आभार जताया। तनेजा के प्रेमनगर स्थित रेस्टोरेंट में ही सार्थक ने नॉन वेज बनाना सीखा था।
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