हरिद्वार के सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी, प्रदीप टम्टा और नरेश बंसल ने अभी तक एक भी गांव का चयन नहीं किया है, जबकि उनमें से कुछ से कम से कम 20219-20 और 2020-21 तक कम से कम दो गांवों को गोद लेने की उम्मीद की जा रही थी।
वर्ष 2014 में जय प्रकाश नारायण की जयंती पर यह योजना शुरू की गई थी। इस योजना के तहत संसद सदस्यों को वर्ष 2019 तक तीन गांव और वर्ष 2024 तक कुल आठ गांवों के सामाजिक व आर्थिक विकास की जिम्मेदारी लेनी है। पहला आदर्श गांव वर्ष 2016 तक और दो अन्य को वर्ष 2019 तक विकसित करना था।
मैं योजना को व्यवहारिक नहीं मानता : टम्टा
कांग्रेस के राज्य सभा सांसद प्रदीप टम्टा का कार्यकाल अब समाप्त होने जा रहा है। छह साल के कार्यकाल में टम्टा ने एक भी गांव गोद नहीं लिया। बकौल टम्टा, सांसद आदर्श ग्राम योजना व्यावहारिक नहीं है। लोकसभा सदस्य पर किसी एक गांव को आदर्श बनाने की जिम्मेदारी डालना अव्यावहारिक है। जब तक राज्य व केंद्र सरकार सहयोग नहीं करेंगी, सांसद के लिए आदर्श गांव बनाना मुमकिन नहीं।
मैंने गांवों की सूची मांगी है : बंसल
राज्य सभा सांसद नरेश बंसल का कहना है कि उन्होंने राज्य सरकार से हरिद्वार और देहरादून जिले में ऐसी ग्राम पंचायत का नाम मांगा है, जहां वास्तव सामाजिक, आर्थिक और ढांचागत रूप से काम किया जा सके। कुछेक दिन में वह चयन कर नाम दे देंगे।