कस्तूरी हिरण के शिकार के लिए है संवेदनशील
अस्कोट वन्यजीव अभयारण्य कस्तूरी हिरन के शिकार के लिए संवेदनशील है। इसके बावजूद यहां अव्यवस्थाएं होने और उपकरणों व कर्मियों की कमी के कारण इसे खराब श्रेणी में रखा गया है। 2020-2022 में हुए अध्ययन में यह ठीक श्रेणी में था।
32 बिंदुओं पर हुआ मूल्यांकनभारतीय वन्यजीव संस्थान के विशेषज्ञों ने देश के 438 वन्यजीव अभयारण्यों और नेशनल पार्कों में संसाधनों की स्थिति, कर्मियों की संख्या, खतरे की स्थिति, स्थानीय समुदाय को संरक्षित का विचार, बुनियादी ढांचे का प्रबंधन और उसके लिए धनराशि समेत 32 बिंदुओं पर परखा है। इसके आधार पर बहुत अच्छा, अच्छा, ठीक और खराब श्रेणी दी है।
इस तरह श्रेणियों में आई गिरावट
| पार्क व अभयारण्य |
पहले |
अब |
| अस्कोट वन्यजीव अभयारण्य |
ठीक |
खराब |
| नंदा देवी नेशनल पार्क |
बहुत अच्छा |
ठीक |
| गोविंद नेशनल पार्क |
ठीक |
ठीक |
| केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य |
ठीक |
ठीक |
| फूलों की घाटी |
अच्छा |
अच्छा |
बिनसर, मसूरी और गंगोत्री में सुधरे हालात
मैनेजमेंट इफेक्टिवनेस इवोल्यूशन ऑफ 438 नेशनल पार्क एंड वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी इन इंडिया 2020-2025 रिपोर्ट में भारतीय वन्य जीव संस्थान ने राज्य के अस्कोट, बिनसर, केदारनाथ, मसूरी और नंधौर अभयारण्य और गोविंद, गंगोत्री, फूलों की घाटी व नंदा देवी नेशनल पार्क का अध्ययन किया। पिछली बार संंबंधित क्षेत्रों में हुए अध्ययन का भी उल्लेख किया। कुछ जगह अच्छा भी हुआ है। बिनसर, मसूरी, नंधौर अभयारण्य और गंगोत्री नेशनल पार्क ठीक से अच्छे की श्रेणी में पहुंचे हैं।
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