देहरादून में लक्खीबाग मोहल्ले के लोगों ने मंगलवार को दोनों संवासिनियों की अस्थियों को विधि विधान के साथ विदा किया।
फूलों से सजी कार में अस्थियों को विसर्जन के लिए हरिद्वार ले जाया गया। लोगों ने कहा कि भले ही संवासिनियों का अंतिम संस्कार प्रशासन ने दिखावे के लिया किया है लेकिन उनकी आत्मा की शांति के लिए कोई प्रयास नहीं किया। ऐसे में लक्खीबाग के लोगों ने आगे आकर दोनों संवासिनियों की अस्थियों का गंगा में विसर्जन किया।
मंगलवार को सभी ने सुबह पूजा में हिस्सा लिया। चार ब्राह्मणों ने सुबह श्मशान घाट पर पूजन किया। यहां से दस बजे पंडित अनिल शर्मा, पंडित नोमी नाथ और क्षेत्रवासी हरिद्वार के लिए रवाना हुए। हरिद्वार में संवासिनियों के अस्थि विसर्जन के साथ ही उनका पिंडदान किया गया। 11वें दिन ब्रह्भोज और हवन किया जाएगा। इस मौके पर पार्षद सुशील गुप्ता, पुष्पा, सीमा, कंचन, विजेंद्र, अमित आदि मौजूद रहे।
संवासिनियों के भोजन का बजट दोगुना
देहरादून नारी निकेतन में संवासिनियों के बीमार पड़ने की स्थिति बेकाबू होते देख मुख्यमंत्री हरीश रावत को अधिकारियों की समीक्षा बैठक बुलानी पड़ी। मुख्यमंत्री ने सख्ती से आदेश दिए कि गंभीर रूप से बीमार संवासिनियों को दूसरी संवासिनियों से अलग रखा जाए।
एक संवासिनी के भोजन के मद में अभी 1600 रुपए महीने खर्च की जा रही धनराशि को उन्होंने बढ़ाकर 3000 रुपए तक कर दिया। साथ ही प्रत्येक संवासिनी का डाइट चार्ट बनाने और प्रतिदिन एक डाक्टर के नारी निकेतन में जाकर संवासिनियों का चेक अप करने के आदेश किए। एक दक्ष नर्स हर वक्त नारी निकेतन में तैनात रखने को कहा।
बीजापुर गेस्ट हाउस में मुख्यमंत्री ने शासन-प्रशासन के अफसरों के साथ नारी निकेतन, अनाथालय, किशोर गृहों की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि नारी निकेतन में भर्ती करते समय ही संवासिनियों के हेल्थ कार्ड बना लिए जाएं। देहरादून के नारी निकेतन में स्थित आब्जर्वेशन होम दूसरी जगह शिफ्ट किया जाए ताकि संवासिनियों के लिए अधिक स्थान उपलब्ध हो।
उन्होंने कहा कि नारी निकेतनों, अनाथालयों, किशोर गृहों में व्याप्त कमियों को सुधारा जाए। अगर किसी संवासिनी की मौत होती है तो एडीएम देहरादून की अध्यक्षता में गठित जांच समिति इसके कारणों की जांच कर आवश्यक सुझाव सहित डीएम को रिपोर्ट दे।
सीएम ने कहा कि मानसिक रूप से बीमार ऐसी संवासिनियां जो इलाज के बाद ठीक हो जाती हैं और उनके परिजन घर नहीं ले जाते, उनके लिए आश्रय स्थल बनाया जाए। इसके लिए सेलाकुई में जगह देखी जाए। नारी निकेतनों में संवासिनियों के लिए पौष्टिक भोजन, स्वच्छ पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
उनके रहने के कमरे हवादार और साफ-सुथरे रहें और पर्याप्त रोशनी हो। बैठक में मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह, अपर मुख्य सचिव एस राजू, प्रमुख सचिव ओम प्रकाश, राधा रतूड़ी, सचिव डा. भूपिंदर कौर औलख, अपर पुलिस महानिदेशक एके रतूड़ी, आईजी संजय गुंज्याल, डीएम रविनाथ रमन, महानिदेशक स्वास्थ्य डा.आरपी भट्ट मौजूद रहे।
विक्षिप्त संवासिनियों के लिए अलग से होम बनेगा
समाज कल्याण विभाग विक्षिप्त संवासिनियों के लिए दून में अलग से होम बनवाएगा। बीमार और स्वस्थ संवासिनियों को एक साथ रखे जाने और संवासिनियों के लगातार बीमार होने से हुई किरकिरी से बचने के लिए विभाग ने सक्रियता दिखानी शुरू कर दी है।
अपर मुख्य सचिव एस. राजू ने बताया कि वैसे प्रदेश में संवासिनियों के लिए कई मेंटल रिटार्डेड होम बनाने की जरूरत है। फिलहाल हरिद्वार में भवन उपलब्ध है, वहां के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। बता दें कि प्रदेश में मानसिक विक्षिप्त संवासिनियों को रखने और इलाज के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।
बीते सालों में दून के नारी निकेतन में मानसिक विक्षिप्त संवासिनियों को रखने के लिए अधिकारियों ने बरेली और दिल्ली के मेंटल रिटार्डेड होम के प्रबंधन से बात की थी, लेकिन वहां के अधिकारियों ने मना कर दिया था। अब दून और हरिद्वार में मेंटल रिटार्डेड होम बनाने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
हरिद्वार के लिए शासन ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है। स्टाफ और दूसरे खर्चों के लिए बजट आवंटित होते ही विक्षिप्त संवासिनियों को वहां शिफ्ट कर दिया जाएगा। मेंटल रिटार्डेड होम में मनोरोग विशेषज्ञ और विक्षिप्त संवासिनियों की सेवा के लिए प्रशिक्षित स्टाफ रखा जाएगा। निदेशक समाज कल्याण वीएस धानिक ने बताया कि दून में मेंटल रिटार्डेड होम के लिए डीएम भूमि उपलब्ध कराएंगे। इस संबंध में डीएम को प्रस्ताव भेज दिया गया है।