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समीर थापर-जयंत नंदा अरेस्टिंग केसः DFO पौड़ी सस्पेंड, SSP को सम्मान

Mon, 09 Jan 2017 12:23 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, कोटद्वार
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sameer thapar - फोटो : amar ujala
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लैंसडौन वन प्रभाग में बड़े उद्योगपति समीर थापर सहित उनके 16 साथियों को जंगल के कानून तोड़ने के मामले में डीएफओ पौड़ी मयंक शेखर को सस्पेंड कर दिया गया है। वहीं केंद्र सरकार की ओर से त्वरित कार्रवाई करने के बदले एसएसपी पौड़ी मुख्तार मोहसीन को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। आईपीएस मुख्तार मोहसीन को महिला एंव बाल विकास मंत्री मेनका संजय गांधी की ओर से एक प्रशस्ति पत्र प्राप्त हुआ है।
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बता दें कि मंगलवार को कोटद्वार की सीजेएम कोर्ट में समीर थापर सहित अन्य 16 आरोपियों को जमानत दिलाने के लिए जाने माने अधिवक्ताओं का जमावड़ा लग गया। दोपहर बाद कोर्ट की सुनवाई शुरू होनी थी। इस दौरान कोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के वकील राजीव आत्मा और राजेंद्र सिंह भी मौजूद रहे।

वहीं सोमवार को कार्बेट नेशनल पार्क से सटे लैंसडौन वन प्रभाग के आरक्षित वन क्षेत्र में नए साल का जश्न मनाने के दौरान वन कानून, आर्म्स एक्ट और आबकारी अधिनियम के उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार उद्योगपति समीर थापर व जयंत नंदा समेत 16 लोगों को पौड़ी जेल भेज दिया गया था।
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आरोपियों की ओर से एसीजेएम भवदीप रावते की अदालत में जमानत के लिए प्रार्थनापत्र लगाया गया था, लेकिन अदालत ने सुनवाई के लिए मंगलवार की तिथि निर्धारित कर दी है। मंगलवार को कोर्ट में उनकी जमानत पर बहस होगी। कोर्ट के आदेश पर कोटद्वार पुलिस सोमवार को रसूखदार आरोपियों को जीएमओयू की साधारण बस में बिठाकर पौड़ी जेल ले गई।

उधर, थापर-नंदा जैसे लोगों की गिरफ्तारी की सूचना मिलते ही दिल्ली से कई नामी वकील कोटद्वार पहुंच गए। आरक्षित वन क्षेत्र में वन कानूनों के उल्लंघन समेत कई धाराओं में दर्ज इस मुकदमे की जांच कालागढ़ के इंस्पेक्टर को सौंप दी गई है।

विवेचना अधिकारी ने सोमवार को कोटद्वार पुलिस टीम के साथ घटनास्थल का मौका मुआयना कर साक्ष्य एकत्र करते हुए विवेचना शुरू कर दी। पुलिस के सर्च आपरेशन के बाद दर्ज मुकदमे से वन विभाग में हड़कंप मचा है।
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14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में पौड़ी जेल भेजा

jail shimla
रविवार की रात न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट से आरोपियों को 30 आर्म्स एक्ट और आबकारी अधिनियम के तहत तो जमानत मिल गई थी, लेकिन वन अधिनियम के मामले में जमानत प्रार्थनापत्र खारिज होने से उन्हें 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में पौड़ी जेल भेज दिया गया।

अधिक देरी होने के चलते समीर थापर और जयंत नंदा समेत सभी आरोपियों को रविवार की रात कोटद्वार कोतवाली में पुलिस अभिरक्षा में बितानी पड़ी। संख्या को देखते हुए पुलिस ने उन्हें थाने में ही एक अलग कमरे में रखा। सीओ जेआर जोशी ने बताया कि सोमवार तड़के जीएमओयू की साधारण बस से उन्हें पौड़ी जेल भेज दिया गया है।

सोमवार को इन लोगों की जमानत के लिए बचाव पक्ष की ओर से एक बार फिर से प्रयास शुरू हुए। दिल्ली से आए करीब आठ-दस नामी-गिरामी वकील सुबह दस बजे ही कोटद्वार के सिमलचौड़ स्थित न्यायालय परिसर पहुंच गए थे, जिससे न्यायालय परिसर में खासी गहमागहमी रही। पुलिस की ओर से अभियोजन अधिकारी अधिवक्ता आशुतोष कंडवाल ने बताया कि बचाव पक्ष की ओर से कोर्ट में आर्म्स एक्ट के तहत अरजेंट सुनवाई का प्रार्थनापत्र दाखिल किया गया था, जिस पर कोर्ट ने बहस के लिए तीन जनवरी की तिथि नियत कर दी है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुख्तार मोहसिन ने बताया कि आरक्षित क्षेत्र में जश्न मनाने के दौरान वन कानूनों की अनदेखी के इस मामले की जांच कालागढ़ के पुलिस इंस्पेक्टर प्रीतम सिंह को सौंपी गई है। कोटद्वार के कोतवाल उत्तम सिंह जिमिवाल की ओर से दर्ज इस मुकदमे की जांच उनके पक्षकार होने के चलते दूसरे थाने के इंस्पेक्टर को सौंपनी पड़ी है। जेलर डीपी सिन्हा ने बताया कि अदालत के आदेशानुसार सभी आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में जिला कारागार में निरुद्ध किया गया है।
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