प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आध्यात्मिक गुरु ब्रह्मलीन स्वामी दयानंद सरस्वती (86) को शुक्रवार सुबह शीशमझाड़ी स्थित दयानंद आश्रम में भू-समाधि दी गई। आश्रम प्रबंधक शुद्धानंद महाराज ने विधि-विधान से समाधि कर्म किया।
विज्ञापन
इससे पूर्व चेन्नई के पंडित जम्मूनाथ गणपाठी के नेतृत्व में आश्रम में सुबह आठ बजे से पूजा-पाठ, जप-तप और समाधि कर्मकांड शुरू हुआ। इसमें आश्रम के सभी संत-महात्माओं ने भाग लिया। इस दौरान स्वामीजी के पार्थिव शरीर के समक्ष रखे शिवलिंग का अभिषेक व पूजन किया गया।
पीएम मोदी के गुरु को ऐसे दी गई भू-समाधि, तस्वीरें
सुबह करीब आठ बजे आश्रम के सत्संग हॉल में रखे स्वामी जी के पार्थिव शरीर को आश्रम के प्रांगण में समाधि स्थल पर लाया गया। लगभग दो घंटे तक विधि-विधान से वैदिक मंत्रोच्चार के साथ समाधि कर्मकांड किया गया। करीब दस बजे ब्रह्मलीन संत को भू-समाधि दी गई। इस दौरान स्वामी दयानंद के शिष्य और अनुयायी भावुक हो गए।
विज्ञापन
भू-समाधि के दौरान मौजूद रहीं हस्तियां
स्वामी दयानंद सरस्वती बुधवार रात 10.20 बजे ब्रह्मलीन हो गए थे। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। 86 वर्षीय स्वामी बुधवार सुबह ही 11 दिन बाद अस्पताल से आश्रम आए थे। बताया जा रहा था कि डॉक्टरों ने उनकी हालत को गंभीर बताते हुए इलाज से इनकार कर दिया था।
इसके बाद स्वामी ने अपने आश्रम में अंतिम सांस लेनी की इच्छा जाहिर की थी, जिसे मानते हुए उन्हें आश्रम लाया गया था। यहां देर रात उन्होंने प्राण त्याग दिए थे। बृहस्पतिवार को उनके पार्थिव शरीर को लोगों के दर्शनार्थ रखा गया था। 11 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वामी दयानंद सरस्वती का हालचाल जानने उनके आश्रम आए थे।
भू-समाधि के दौरान विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल, साध्वी प्राची, सुप्रीमकोर्ट के न्यायाधीश शरद कुमार वेणुगोप्पा, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव, विधायक प्रेमचंद अग्रवाल, दत्ताश्रय होसबोले, कोटेश्वर राव, शांतात्मानंद सरस्वती, स्वामी स्वतंत्रतानंद, कुंभ मेलाधिकारी एसए मुरुगेशन, विहिप के महामंत्री दिनेश, ज्योति सजवाण, शिवमूर्ति कंडवाल, गोविंद अग्रवाल, गोपाल अग्रवाल, गुणानंद रयाल आदि मौजूद थे।
शिवलिंग स्थापित आश्रम परिसर में स्वामी दयानंद सरस्वती को भू-समाधि दिए जाने के दौरान उनकी समाधि में पार्थिव शरीर पर नमक, भस्म, बेलपत्र, तुलसीपत्ता, हल्दी आदि अनेक औषधियां अर्पित की गई। इसके बाद समाधि पर उनकी स्मृतिस्वरूप शिवलिंग स्थापित किया गया।
शुक्रवार को दयानंद आश्रम में ब्रह्मलीन संत दयानंद सरस्वती की समाधि के मौके पर देस-विदेश से जुटे शिष्यों, अनुयायियों ने अपने आध्यात्मिक गुरु के अंतिम दर्शन किए और भावुक होकर अंतिम विदाई दी। इस मौके पर अनुयायियों ने उन्हें वेदांत का महान ज्ञाता और बेहतर आध्यात्मिक पथ प्रदर्शक बताया।
स्वामी दयानंद सरस्वती वेदांत के महान ज्ञाता थे। उनके सानिध्य में वेदांत का ज्ञान और उनका पाठ करना हमारे लिए अविस्मरणीय रहेगा। -स्वामी ओमकारानंद, दयानंद आश्रम।
स्वामी दयानंद सरस्वती एक महान पुरुष थे। उन्हें वेदांत की गहरी जानकारी थी। उनसे वेदांत सीखने के लिए हम तीर्थनगरी स्थित आश्रम में आए थे। लेकिन हमें यह हमेशा अफसोस रहेगा कि अब वह हमारे बीच नहीं रहे। -नीला, जर्मनी।
हमें जीवन में पहली बार ऐसा मौका मिला कि, हम इतने महान संत महापुरुष के सानिध्य में वेदांत का श्रवण और पाठ करें। यह हमारे लिए जीवन की सर्वोत्तम उपलब्धि होगी। उनके जाने का हमें गहरा दुख है। -कार्लो, ब्राजील।
संत दयानंद सरस्वती के निधन पर आश्रम परिसर में संत-महात्माओं राजनेताओं और उनके अनुयायियों की भीड़ देखकर बहुत आश्चर्यचकित हूं। कभी सोचा भी नहीं था कि जीवन में इतने महान पुरुष से वेदांत सीखने का सौभाग्य मिलेगा। यह मेरे लिए आजीवन अविस्मरणीय रहेगा। -एरिका, स्पेन।