जम्मू-कश्मीर भारत का अविभाज्य अंग है। कश्मीर में नौजवानों को उकसाया जा रहा है। कश्मीर के मसले पर किसी की भी मध्यस्थता स्वीकार नहीं की जाएगी। हुर्रियत का समय अब जा चुका है और आतंकवाद की दवा अलग होती है। कश्मीर में नौजवानों को संवाद के माध्यम से समझाया जा सकता है।
पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने एक होटल में पत्रकारों से बातचीत में ये बातें कहीं। उन्होंने कहा, कश्मीर में बहकावे में आकर पत्थरबाजी करने वाले युवा अपना नुकसान कर रहे हैं और समाज को कुंठित कर रहे हैं। परिस्थितियों का सामना करने वाली सरकार को समस्याएं आती हैं। केंद्र सरकार भी कांग्रेस की तर्ज पर मध्यस्थता स्वीकार न करने के निर्णय पर अडिग रही।
कहा कि कश्मीर में अगर सामान्य स्थिति जल्द से जल्द नहीं आई तो स्थितियां गंभीर हो सकती हैं। कश्मीर मसले का हल निकालने के लिए केंद्र सरकार को विपक्ष के साथ गंभीरता से चर्चा करनी चाहिए। कश्मीर के बच्चों का दिल जीतकर स्थितियों को बदला जा सकता है। कहा कि हुर्रियत को लेकर सरकार आंख न मूंदे। हर सरकार संपर्क बनाकर रखती है।
बातचीत से खून खराबा समाप्त करने का प्रयास होता है। कई बार बातचीत के बाद उबाल घटा है। कहा कि पाकिस्तान से आमने-सामने बैठकर आतंकी हमले के सबूत देने चाहिए। एक-दूसरे पर आरोप लगाना उचित नहीं है। सरकार को विपक्ष का सम्मान करना चाहिए।
खुर्शीद ने कहा कि भाजपा को वोट देने वाले अब विचार कर रहे हैं। सरकार चला रहे लोगों में निराशा बढ़ रही है।
उत्तर प्रदेश में समस्याएं अधिक हैं अगर सरकार इसे कम नहीं कर पाई तो समस्याएं और अधिक बढ़ेंगी। खुर्शीद ने कहा कि वादे बहुत किए गए थे। किसान सड़क पर आ रहा है। व्यापारी परेशान हैं और बुद्धिजीवी भी आत्ममंथन कर रहा है। आने वाले चुनाव भाजपा के लिए जीतना आसान नहीं होगा।