बहुचर्चित हत्याकांड के खुलासे के लिए आईजी (कानून व्यवस्था) अशोक कुमार के निर्देश पर एसएसपी बरिंदरजीत सिंह ने एएसपी डॉ. जगदीश चंद्र के निर्देशन में छह टीमों का गठन किया था। इन टीमों में एक सीओ दो ट्रेनी सीओ, दो निरीक्षक, एक एसओ के अलावा नौ एसआई और 50 कांस्टेबलों को लगाया गया था। इसके अलावा एसटीएफ और एसओजी की टीमों को लगाया गया था। इन टीमों ने लगातार पांच दिनों तक मोबाइल टावरों से डंप डाटा प्राप्त किया। इस दौरान पांच हजार से अधिक संदिग्ध नंबरों की पड़ताल की गई। इसके अलावा करीब 300 सीसीटीवी कैमरों से फुटेज उठाए गए।
तीन दिन की माथापच्ची से मिला बाइक का सुराग
हत्यारोपी की मदद के लिए उपलब्ध कराई गई बाइक का नंबर (यूके 18 जे 0431) ट्रेस करने में भी पुलिस को माथापच्ची करनी पड़ी। बाइक की नंबर प्लेट अपूर्ण होने के कारण पुलिस टीमों ने तीन-तीन नंबरों की सीरीज तैयार कर वाहनों के पंजीकृत स्वामियों के बारे में डाटा जुटाया। कई दिनों की मशक्कत के बाद पुलिस बाइक के स्वामी तक पहुंच सकी। एसओ आईटीआई कुलदीप अधिकारी ने आरोपी दोनों भाइयों मनोज और विनोद को गिरफ्तार कर लिया। सख्ती करने पर दोनों भाइयों ने पिंकी की हत्या का राज खोल दिया।
शोरूम स्वामी को पुलिस ने दी क्लीन चिट
पिंकी की हत्या में शक के आधार पर आरोपी बनाए गए शोरूम स्वामी मनीष चावला को पुलिस ने क्लीन चिट दे दी। एसएसपी ने बताया कि पुलिस टीमों ने इस हत्याकांड को लेकर मनीष की भूमिका के बारे में गहनता से पड़ताल की। जांच के दौरान मनीष को पूरी तरह से निर्दोष पाया गया।
पिंकी को वीरांगना लक्ष्मीबाई पुरस्कार
पिंकी रावत हत्याकांड के खुलासे के लिए पर्वतीय महासभा के अध्यक्ष एसएस जीना, कांग्रेसी नेता मनोज जोशी, प्रदीप जोशी आदि ने एसएसपी से मिलकर पुलिस की कार्यशैली पर संतोष व्यक्त किया। कांग्रेसी नेता मनोज जोशी ने कहा कि पिंकी अपने कर्तव्य का पालन करते हुए बदमाशों के कृत्य की शिकार हुई है। इस कारण पर्वतीय महासभा द्वारा दिवंगत पिंकी को वीरांगना लक्ष्मीबाई पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।