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परिवार के बिना कहीं कमजोर न पड़ जाएं जूनियर बहुगुणा

Fri, 18 Apr 2014 12:02 PM IST
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड के हर चुनाव में खुद प्रचार अभियान का फ्रंट संभालने वाला बहुगुणा परिवार चाहकर भी प्रचार अभियान में एकजुट नहीं हो सकता है।
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रीता और शेखर बहुगुणा की अहम भूमिका
सितारगंज से लेकर टिहरी संसदीय उपचुनाव में चुनाव प्रचार प्रबंधन की बागडोर पूरी तरह बहुगुणा परिवार के हाथ रही, जिसमें बहन रीता बहुगुणा और भाई शेखर बहुगुणा की अहम भूमिका रही है।

इस बार रीता बहुगुणा खुद लखनऊ से भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह के खिलाफ मैदान में है, जिससे परिवार के सदस्य दो जगह बंट गए हैं।

हेमवती नंदन बहुगुणा की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने में परिवार हर चुनाव में एक कुशल प्रबंधन टीम की तरह मोर्चा संभालता रहा है।

परिवार चुनाव क्षेत्र को सेक्टर में बांट कर उसकी कमान अपने हाथ पर रखता है, लेकिन इस बार हालात पूरी तरह अलग हैं। एंटी इनकम्बेंसी फेक्टर झेल रही कांग्रेस के लिए हर सीट बेहद महत्वपूर्ण है।
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टिहरी में अभी पहुंचना संभव नहीं
ऐसे में लखनऊ सीट से प्रचार अभियान छोड़कर रीता बहुगुणा और शेखर बहुगुणा का टिहरी में अभी पहुंचना संभव नहीं है।

वहीं टिहरी से साकेत एक बार चुनाव हार चुके हैं, जिससे विजय बहुगुणा के लिए बेटे का प्रचार अभियान छोड़ लखनऊ में प्रचार संभालना संभव नहीं।

साकेत चुनाव प्रबंधन में खुद भी माहिर हैं, लेकिन इस बार वह खुद प्रत्याशी हैं, जिससे सारा जिम्मा पिता विजय बहुगुणा, पत्नी गौरी और भाई सौरभ के भरोसे है।

परिवार के लिए राहत यह है कि लखनऊ सीट पर 30 अप्रैल को चुनाव होने के बाद परिवार के पास टिहरी के लिए पांच दिन प्रचार अभियान के लिए शेष हैं। आखिरी पांच दिनों में परिवार को क्षेत्र में पूरी ताकत झोंकने की उम्मीद हैं।

पर इसमें कितना हो पाएगा यह अभी साफ नही है। खुद सुधा बहुगुणा बीमार चल रही है। बहुगुणा परिवार के नजदीकी लोग जानते हैं कि सुधा बहुगुणा ही हैं जो इस परिवार के फेस के रूप में भी सक्रिय रहती आई हैं।

कई विश्वासपात्र और करीबी खुद चुनाव में उलझे
करीबी भी उलझे अपने क्षेत्रों में पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की टीम में उनके कांग्रेस का साथ तो मिलेगा, लेकिन कई विश्वासपात्र और करीबी खुद चुनाव में उलझे हैं। कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत खुद पौड़ी लोकसभा सीट से प्रत्याशी हैं।

कैबिनेट मंत्री प्रीतम सिंह टांग में फ्रेक्चर के चलते नामांकन में नहीं पहुंच सके। परिवार के करीबी विधायक सुबोध उनियाल पौड़ी लोकसभा सीट में व्यस्त रहेंगे।
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पीडीएफ के सदस्य विधायक दिनेश धनै और कैबिनेट मंत्री प्रीतम सिंह पंवार की स्थिति अस्पष्ट है। उधर, सीएम हरीश रावत ने भले साकेत के नामांकन में पहुंचकर साकेत के कंधे पर हाथ रखा, लेकिन वह खुद हरिद्वार से पत्नी के चुनाव में उलझे हुए हैं।
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