पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती और न ही इसके लिए कोई बाध्यता है। कनखल मंदिर (हरिद्वार) के बाबा दिव्यगिरि ने संत होते हुए पढ़ाई की तम्मना को पूरा करने की ठानी है और इसीलिए शनिवार को वह रामनगर डिग्री कालेज में प्राइवेट परीक्षा फार्म जमा करने पहुंचे।
बाबा ने एमए (हिंदी) प्रथम वर्ष की परीक्षा के लिए आवेदन किया है। वह गढ़वाल विवि से ज्यादा कुमाऊं विवि के पैटर्न की तारीफ करते हैं। हालांकि कुमाऊं विवि से उनकी यह पहली परीक्षा होगी, मगर कहते हैं एमए की डिग्री लेने का उनका सपना इसी विवि से जुड़ा है।
26 साल के दिव्यगिरी बाबा हाईस्कूल और इंटर की पढ़ाई हरिद्वार से पूरी की तो स्नातक गढ़वाल विवि से। परीक्षा फार्म भरने के दौरान हुई भेंट में बाबा ने कहा कि कुमाऊं विश्वविद्यालय से वह अच्छे अंकों के साथ एमए पास करेंगे, इसकी उम्मीद है।
क्योंकि कुमाऊं विवि के प्रश्नपत्रों में लघु उत्तरीय, विकल्प वाले प्रश्न अधिक होते हैं। इससे विद्यार्थी को पाठ्यक्रम को गहराई तक पढ़ना पड़ता है।