हरिद्वार में गंगा के कई घाटों पर जल लाने की मांग को लेकर साधु-संतों का धरना भूमा घाट पर प्रारंभ हो गया।
विभिन्न अखाड़ों और आश्रमों के संतों ने इस बात आक्रोश जताया कि सरकार लगातार गंगा की उपेक्षा कर रही है। अर्द्धकुंभ होने के बाद भी अधिकारी गंभीर नहीं हैं। संतों ने एक स्वर से मांग की है कि उन सभी घाटों पर गंगा जल छोड़ा जाए जो जल विहीन होते जा रहे हैं।
जून अखाड़े के राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत देवानंद सरस्वती ने कहा कि घाटों पर गंगा जल लाने में सरकार नाकामयाब रही है। उत्तरी हरिद्वार के घाटों पर रेत के टीले बन गए है। गंगा की सफाई और समतलीकरण का एक भी प्रयास नहीं किया गया।
भूमापीठाधीश्वर स्वामी अच्युतानंद तीर्थ ने कहा कि यदि गंगा जल घाटों पर नहीं आया तो साधु-संत स्नान छोड़ने की घोषणा कर सकते हैं। उन्होंने सभी संतों से गंगा रक्षा का संकल्प कराया। महामंडलेश्वर स्वामी प्रेमानंद से कहा कि गंगा घाटों का समतलीकरण तत्काल होना चाहिए। गंगा का जल घाटों से काफी दूर बह रहा है। श्रद्धालुओं को बिना नहाये वापस लौटना पड़ रहा है।
सनातन समाज के अध्यक्ष श्रीमहंत विनोद गिरी ने घोषण की है कि जब तक जल विहीन घाटों पर जल प्रवाह नहीं हो जाता तब तक संतों का धरना जारी रहेगा। गंगा अविरलता के साथ संत कोई समझौता नहीं करेंगे।
महामंत्री विनोद महाराज ने कहा कि केवल हरकी पैड़ी क्षेत्र की सफाई कर पूरी गंगा की सफाई मान ली जाती है। इस मौके पर महंत सुरेशानंद सरस्वती, स्वामी साधनानंद, बाबा बचन सिंह, ललितानंद, कल्याणानंद, मां चन्द्रकांता, साध्वी रंजना, आराधना गिरी, मीरा गिरी, मिथलेश पुरी, माधवानंद, रामगिरी आदि संतों ने भी विचार रखे।