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117 दिनों से अनशन पर बैठे संत गोपालदास को पुलिस ने मातृसदन से उठाया, एम्स में कराया भर्ती

Wed, 17 Oct 2018 03:47 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हरिद्वार
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मातृसदन में मौजूद पुलिस और प्रशासन की टीम - फोटो : अमर उजाला
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बुधवार को दोपहर बाद संत गोपालदास को उठाने के लिए पुलिस मातृसदन पहुंची। लेकिन उन्होंने खुद को कमरे में बंद कर लिया। जिसके बाद गोपाल दास ने अपने खून से एक खत लिखा। अभी उनका पत्र सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसके बाद काफी मशक्कत करने पर पुलिस ने संत गोपालदास को कमरे से निकालकर एम्स में भर्ती कराया। 

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इससे पहले सुबह हरिद्वार जिला अस्पताल से आई मेडिकल टीम से संत गोपाल दास ने जांच करवाने से भी इनकार कर दिया था। मातृसदन पहुंची डॉक्टरों की टीम को उन्होंने संन्यास परंपरा का हवाला देते हुए जांच कराने से मना किया था। हालांकि डॉक्टरों की टीम मातृ सदन के बाहर खड़ी रही। वहीं आज दोपहर बाद संत गोपालदास अनिश्चितकालीन मौन साधना भी शुरू कर दी।

गंगा रक्षा के लिए स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद के समर्थन में 116 दिनों से अनशन कर रहे संत गोपालदास मंगलवार को एम्स से डिस्चार्ज होकर मातृ सदन पहुंचे थे। यहां पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने देह त्यागने के लिए संथारा साधना का एलान किया था।
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उन्होंने कहा था कि एम्स में स्वामी सानंद की प्राकृतिक मौत नहीं हुई और एम्स उनके जीवन के लिए भी सुरक्षित नहीं है। वहीं, मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद ने कहा कि वे गोपालदास से संथारा साधना के दौरान जल न त्यागने की अपील करेंगे। 

एम्स से डिस्चार्ज होने के बाद मंगलवार को एक लेखपाल के साथ संत गोपालदास मातृ सदन पहुंचे थे। यहां पत्रकारों से वार्ता के दौरान संत गोपालदास ने आरोप लगाया कि एम्स के चिकित्साधीक्षक ने उन पर दबाव बनाकर यह बुलवाने का प्रयास किया कि मातृ सदन या कोई अन्य संत उन्हें जबरन अनशन पर बैठा रहा है।

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स्वामी सानंद को दिया जाए भारत रत्न 

उन्होंने कहा था कि चिकित्साधीक्षक ने यह भी कहा कि यदि वह किसी के दबाव में या किसी समस्या के कारण अनशन कर रहे हैं, तो उनकी सभी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। संत गोपालदास का कहना है कि वह स्वेच्छा से अनशन पर बैठे हैं। उन्होंने कहा कि जब 24 जून को वह अनशन पर बैठे थे तो इसकी जानकारी मातृ सदन को नहीं थी।

संत गोपालदास ने कहा कि उन्होंने गंगा को बचाने के लिए संकल्प लिया है और उनके लिए शरीर से ज्यादा जरूरी भारतीय सभ्यता की सुरक्षा है। अपने सामने वे सभ्यता को खत्म होते नहीं देख सकते। उन्होंने कहा कि वह सरकार की कार्यप्रणाली से खिन्न होकर संथारा साधना में जा रहे हैं और आज से अनिश्चितकालीन मौन धारण कर लेंगे। संत गोपालदास ने बताया कि बीती 13 अक्तूबर को उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर संथारा साधना के दौरान शासन और प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की खलल न डालने की अपील की थी।

संत गोपालदास ने कहा कि गंगा के लिए स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद का अतुलनीय योगदान है। उन्होंने देश के लिए कई बड़े कार्य करने सहित गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए अपना सर्वस्व त्याग दिया। केंद्र सरकार को उनके कार्यों और समर्पण का सम्मान करते हुए भारत रत्न से सम्मानित करना चाहिए।
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