उन्होंने कहा था कि चिकित्साधीक्षक ने यह भी कहा कि यदि वह किसी के दबाव में या किसी समस्या के कारण अनशन कर रहे हैं, तो उनकी सभी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। संत गोपालदास का कहना है कि वह स्वेच्छा से अनशन पर बैठे हैं। उन्होंने कहा कि जब 24 जून को वह अनशन पर बैठे थे तो इसकी जानकारी मातृ सदन को नहीं थी।
संत गोपालदास ने कहा कि उन्होंने गंगा को बचाने के लिए संकल्प लिया है और उनके लिए शरीर से ज्यादा जरूरी भारतीय सभ्यता की सुरक्षा है। अपने सामने वे सभ्यता को खत्म होते नहीं देख सकते। उन्होंने कहा कि वह सरकार की कार्यप्रणाली से खिन्न होकर संथारा साधना में जा रहे हैं और आज से अनिश्चितकालीन मौन धारण कर लेंगे। संत गोपालदास ने बताया कि बीती 13 अक्तूबर को उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर संथारा साधना के दौरान शासन और प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की खलल न डालने की अपील की थी।
संत गोपालदास ने कहा कि गंगा के लिए स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद का अतुलनीय योगदान है। उन्होंने देश के लिए कई बड़े कार्य करने सहित गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए अपना सर्वस्व त्याग दिया। केंद्र सरकार को उनके कार्यों और समर्पण का सम्मान करते हुए भारत रत्न से सम्मानित करना चाहिए।