उनकी कथनी और करनी में बहुत फर्क आ गया है। पूरा सिस्टम न जाने किस साजिश के तहत गूंगा और बहरा हो गया है। इसलिए वह जैन धर्म परंपरा के तहत संथारा पद्धति से गंगा के लिए देह का त्याग करना चाहते हैं।
स्वामी गोपालदास ने कहा कि मां गंगा के संरक्षण को लेकर जिस तरह का माहौल है, उसमें देशभर के संतों, विद्वानों और गंगाप्रेमियों को भी अपना मौन तोड़ देना चाहिए। जीवनदायिनी गंगा की बर्बादी का तमाशा मूकदर्शक बनकर कब तक लोग देखते रहेंगे।
पहाड़ पूंजीपतियों की बपौती नहीं है। गंगा संरक्षण के लिए एनजीटी, कैग, शोध संस्थानों और सुप्रीम कोर्ट की सिफारिशों तक को ताक पर रख दिया गया है। उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। इंतजार है कि कब जवाब आएगा। इसके साथ ही आंदोलन की अगली रणनीति तय होगी।
पूरे मामले पर एम्स के पीआरओ हरीश थपलियाल का कहना है कि पेशेंट और तीमारदार से विनम्र व्यवहार करना हमारी परंपरा है। संत गोपालदास ने जो चिकित्सा अधीक्षक पर अभद्र व्यवहार का आरोप लगाया हैस वह पूरी तरह गलत है। कोई वीडियो नहीं बनाया जा रहा है। हमारी कोशिश है कि संत के स्वास्थ्य में सुधार हो। अस्पताल में इलाज किया जाता है बाकी मुद्दों से हमारा कोई सरोकार नहीं।
संत गोपालदास का बिगड़ता स्वास्थ्य, राष्ट्र के लिए चिंता का विषय है। गंगा में खनन पर रोक लगाने के लिए वे 24 जून से उपवास पर बैठे हैं। संत गोपालदास, हमारे बीच, स्वामी सानंद (प्रो. जीडी अग्रवाल) की आवाज हैं। यह आवाज बुलंद रहनी चाहिए।
-राहुल गांधी का ट्वीट