52 एकड़ भूमि की गई थी चयनित
जखोली में सैनिक स्कूल के लिए 52 एकड़ भूमि चयनित की गई थी। स्कूल बनने से कम से कम 300 छात्रों को शैक्षणिक सुविधा मिलती। स्कूल के लिए स्थानीय ग्रामीणों ने यह सोचकर की क्षेत्र में सैनिक स्कूल बनेगा अपनी कृषि और गैर कृषि भूमि दान की थी।
सैनिक कल्याण-शिक्षा विभाग के बीच भी उलझा मामला
सैनिक स्कूल के निर्माण को लेकर शिक्षा और सैनिक कल्याण विभाग के बीच भी मामला उलझा रहा। शुरुआत में स्कूल का निर्माण कार्य सैनिक कल्याण विभाग ने कराया। जब काम लटक गया तो इसे शिक्षा विभाग को सौंप दिया गया।
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कोई योजना अच्छी है, तो उसका काम यह सोचकर नहीं रोका जाना चाहिए कि इसका श्रेय हरक को मिल जाएगा। इस स्कूल में मेरे बच्चे नहीं पढ़ते, इससे पूरे प्रदेश का भला होता। स्कूल के लिए केंद्र से मंजूरी मिल गई थी, सड़क, बिजली, पानी की व्यवस्था की गई थी। इसके खुलने से राज्य में दो सैनिक स्कूल हो जाते। -डाॅ. हरक सिंह रावत, पूर्व सैनिक कल्याण मंत्री
जिस स्थान पर स्कूल प्रस्तावित हैं, वहां स्लोप बहुत है, स्कूल निर्माण में बहुत अधिक लागत आ रही है, बिजली, पानी की भी दिक्कत है। विभाग की ओर से स्कूल की डीपीआर तैयार कराकर इसे शासन को भेज दिया गया है। अब शासन स्तर से इस पर निर्णय लिया जाना है। -बंशीधर तिवारी, शिक्षा महानिदेशक