अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता बाबा हठयोगी दिगंबर अखाड़ों के कुछ संतों पर भड़क उठे हैं। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि यदि उन्होंने पोल खोली तो कइयों को भारी पड़ेगा। हठयोगी ने मांग की है कि साईं ट्रस्ट के बारे में कराई गई जांच की रिपोर्ट हरि गिरि जग जाहिर करें।
गरुड़ आश्रम में पत्रकारों से बाबा हठयोगी ने कहा कि वे शिरडी के साईं बाबा मंदिर दर्शनार्थ गए थे। उनकी मान्यता है कि साईं बाबा देश की एक बड़ी धार्मिक हस्ती थे। उन्होंने शिरडी जाकर किए जा रहे सेवा प्रकल्पों का पता लगाया।
शंकराचार्य स्वरूपानंद द्वारा साईं बाबा के विरोध को उन्होंने पहले ही नापसंद कर दिया था। आश्चर्य की बात है कि अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि ने कोई जांच समिति गठित की है। यह समिति साईं ट्रस्ट द्वारा अखाड़ों के बीच धनबल पर फूट डालने के कथित प्रयासों की जांच कर रही है।
शंकराचार्य की धर्म संसद में नहीं जाएंगे ज्ञानदास
बाबा हठयोगी दिगंबर ने कहा कि अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत ज्ञानदास का पूरा समर्थन उन्हें प्राप्त है। शंकराचार्य की धर्म संसद में ज्ञानदास नहीं जा रहे। जिन्हें जाना है, वे जाएं पर जांच के नाम पर दूसरों को बदनाम न करें।
महामंडलेश्वर कपिल मुनि के नेतृत्व में हरिद्वार के कुछ संत बृहस्पतिवार की रात धर्म संसद में शामिल होने के लिए रायपुर रवाना हुए। कईं संत और अखाड़ों के प्रतिनिधि काशी व प्रयाग से रायपुर, छत्तीसगढ़ पहुंचेंगे।
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत ज्ञानदास और महामंत्री हरि गिरि रायपुर नहीं जाएंगे। अलबत्ता दोनों ने अपने अखाड़ों के साथ-साथ सभी 13 अखाड़ों के प्रतिनिधियों को शुक्रवार की शाम शेखावाटी, राजस्थान से रायपुर रवाना कर दिया। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने रायपुर में 24-25 अगस्त को धर्म संसद बुलाई है।
शेखावाटी में रहेंगे ज्ञानदास और हरिगिरि
शुक्रवार को शेखावाटी में देशभर के वैष्णव संतों का सम्मेलन शुरू हुआ है। ज्ञानदास और हरि गिरि सहित अखाड़ों के संत इस सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। श्रीमहंत हरि गिरि ने फोन पर बताया कि सभी 13 अखाड़ों के प्रतिनिधि रायपुर की धर्म संसद में भाग लेंगे।
शेखावाटी से जूना अखाड़े के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्रीमहंत प्रेम गिरि के नेतृत्व में विद्यानंद सरस्वती, उमा शंकर भारती, नरेंद्र गिरि, रामानंद पुरी, रवींद्र पुरी आदि रायपुर रवाना हो गए। उन्होंने बताया कि तीनों बैरागी अणियों के प्रतिनिधियों के रूप में श्रीमहंत धर्मदास, केशवदास और राजेंद्र दास अयोध्या से चले गए हैं। काशी और प्रयाग से अखाड़ों के अनेक संत धर्म संसद में भाग लेने के लिए गए हैं।
श्रीमहंत हरि गिरि ने बताया कि वैष्णव सम्मेलन में व्यस्तता के चलते ज्ञानदास और वे खुद अभी शेखावाटी में रहेंगे। शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के नेतृत्व में होने वाली धर्म संसद जो भी निर्णय करेगी, समूचा संत समाज उसका अनुसरण करेगा।