उन्होंने कहा कि देहरादून के जिलाधिकारी रहते हुए सी. रविशंकर ने 30 जनवरी की रात को तो पद्मावती को मेडिकल परीक्षण के लिए दून अस्पताल में रुकवा लिया था लेकिन उन्हें हरिद्वार आए करीब दो सप्ताह से ज्यादा समय हो गया है, उन्होंने एक बार भी मातृसदन से संवाद करना उचित नहीं समझा। इसी से लगता है कि प्रशासन की मंशा ठीक नहीं है।
प्रशासन लगातार मातृ सदन के संतों से आग्रह कर रहा है कि अनशन समाप्त कर दिया जाए। सोमवार सुबह साध्वी पद्मावती की तबीयत खराब होने पर उन्हें निजी एंबुलेंस से दिल्ली ले जाने की सूचना मिली थी। प्रशासन चाहता था कि ऋषिकेश एम्स में इलाज कराया जाए, लेकिन जब संतों ने इनकार किया तो कड़ी सुरक्षा के बीच दिल्ली भिजवाया गया है। रास्ते में जितने भी जिले पड़ते हैं वहां के जिलाधिकारियों से आग्रह किया गया है कि यदि जरूरत पड़े तो आकस्मिक रूप से अपने यहां इलाज कराए जाने की व्यवस्था करने। कहीं जाम में न जूझना पड़े इसके लिए अतिरिक्त वाहन साथ भेजा गया। चिकित्सक को भी साथ में भेजा गया है।
- सी रविशंकर, जिलाधिकारी हरिद्वार