हाड़ कंपा देने वाली सर्दी और ग्लेशियर के खतरों की बीच गंगोत्री में एक साधक निरंतर 17 वर्ष से भागीरथी में खडे़ होकर अनूठी साधना कर रहा है।
ढाई घंटे प्रात: एवं कभी रात 12 बजे भी रो-रोकर अपनी अश्रुधारा के अंश को गंगा सागर तक पहुंचाने की चेष्टा करने वाला यह साधक है स्वामी वेदांतानंद। वह मां गंगा के साक्षात दर्शन के लिए यह तपस्या कर रहा है।
वह गंगोत्री से कुछ दूरी पर बिना किसी सहायक व चेले के एक गुफा में अकेले रहते हैं। इतना ही नहीं यहां वह किसी को फटकने भी नहीं देते हैं ताकि उनकी साधना में विघ्न न पहुंचे।