सूखे गदेरे को रिचार्ज और पथरीली जमीन को हराभरा करने वाले पर्यावरणविद ‘पाणी राखो’ आंदोलन के जनक सच्चिदानंद भारती को पर्यावरण के क्षेत्र में केंद्र सरकार ने सम्मानित किया है।
उन्हें पर्यावरण मंत्रालय की ओर से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय पर्यावरण पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। दिल्ली में पर्यावरण सचिव भारत सरकार अशोक लवासा ने उन्हें पुरस्कार से सम्मानित किया।
पौड़ी जिले के बीरोंखाल ब्लाक के गाडखर्क गांव के मूल निवासी पर्यावरणविद् और सेवानिवृत्त शिक्षक सच्चिदानंद भारती पिछले 35 वर्षों से पर्यावरण के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उनका पाणी राखो आंदोलन विश्व प्रसिद्ध है। उन्होंने कई गांवों के आसपास जंगल ही तैयार नहीं किए बल्कि सूखे स्रोतों को रिचार्ज किया है।
भारती को पुरस्कार स्वरूप सिल्वर ट्राफी और दो लाख दो लाख की धनराशि दी गई। भारती पिछले कई वर्षों से कोटद्वार के भाबर स्थित घमंडपुर गांव में निवास कर रहे हैं। इंटर कॉलेज उफ्रैंखाल से सेवानिवृत्त भारती ने पर्यावरण के क्षेत्र में कई उपलब्धियां हासिल की हैं।