रूस की इस महिला खिलाड़ी ने तीर्थनगरी हरिद्वार पहुंचकर भगवान विष्णु के साथ विवाह रचाया।
मांगलिक दोष भारतवासियों को ही नहीं अपितु विदेशी जगत को भी सताने लगा है। पूरी दुनिया मानने लगी है कि भारतीय ज्योतिष परंपरा अनेक मायनों में सर्वश्रेष्ठ है।
यही वजह थी कि रुस की धाविका क्रिस्टीन शेरापोवा दोष निवारणार्थ हरिद्वार आईं। उन्होंने भारतीय परंपरा के अनुसार विष्णु प्रतिमा से ब्याह रचाया। स्वदेश लौटकर क्रिस्टीन अब अपने प्रेमी से विवाह रचाएगी।
पूर्ण वैदिक विधि-विधान के साथ हुआ विवाह
क्रिस्टीन का विवाह भारतीय प्राच्य विद्या सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. प्रतीक मिश्रपुरी ने पूर्ण वैदिक विधि-विधान के साथ भगवान विष्णु से कराया।
क्रिस्टीन के अष्टम भाव में मंगल को देखकर अपनी विदेश यात्रा के दौरान डॉ. मिश्रपुरी ने सुझाव दिया था कि वे संकट टालने के लिए पहले विष्णु प्रतिमा से विवाह कर ले। क्रिस्टीन चाहती थी कि उसका दांपत्य जीवन सुखमय हो।
फलस्वरूप वह अपने मित्रों के साथ हरिद्वार पहुंची और कनखल में विधि-विधान के अनुसार विष्णु प्रतिमा से विवाह संपन्न हुआ।
सुखमय जीवन की राह खुली
विष्णु विवाह में अग्नि के सम्मुख सात फेरे नहीं लिए जाते। दस बार डोरी को कन्या के गले से विष्णु प्रतिमा के चारों और घुमाया जाता है।
इस विवाह में सप्तपदी भी नहीं होती। विवाह में कन्या को विष्णु के अर्पण कर दिया गया। डॉ. मिश्रपुरी के अनुसार मांगलिक दोष कम हो तो केले के वृक्ष अथवा जलकुंभ के साथ भी विवाह कराया जा सकता है।
चूंकि क्रिस्टीन की कुंडली में मंगल दोष बहुत प्रबल था अत: विष्णु से विवाह कराकर उसके सुखमय जीवन की राह खोल दी गई।
भारत आकर बहुत खुश हुई क्रिस्टीन
निरापद दांपत्य के लिए विष्णु विवाह करने आई क्रिस्टीन बेहद प्रसन्न है। उनके साथ दोस्त मारिया और एलिना रूस से आईं हैं। जर्मनी में रहने वाली क्रिस्टीन की दोस्त हेलेना भी उनके साथ आईं।
भारतीय परंपरा के अनुसार विवाह का आनंद सभी विदेशियों ने लिया। विवाह के बाद क्रिस्टीन ने बताया कि उसे यह जानकर आश्चर्य होता था कि भारत में विवाह के बाद तलाक क्यों नहीं होता है।
आखिरकर क्यों भारतीय दंपति मृत्यु तक एक दूसरे से बंधे रहते हैं। यहां आकर सब कुछ साफ हो गया। भारतवासी भगवान के सहारे बड़े-बड़े काम कर जाते हैं।
वास्तव में यह ब्रह्मांड ग्रह-नक्षत्रों से जुड़ा है। विष्णु विवाह के बाद अब वह आधी भारत की हो गई। अपने देश जाकर प्रेमी संग विवाह करेगी और एक बार फिर भारत देश आएगी।
विदेशियों को भी सताते हैं ग्रह
ज्योतिष केवल भारत के लिए नहीं है। इसका संबंध पूरे संसार से है। विदेशों में एक व्यक्ति पांच-पांच विवाह करता है। यह सब दोषों के कारण हैं।
अब विदेशी मानने लगे हैं कि जन्म कुंडली का जीवन के साथ पूरा रिश्ता है। फलस्वरूप भारत में हरिद्वार, ऋषिकेश, पुष्कर, काशी आदि स्थानों पर आकर विदेशी विवाह करने लगे हैं।
सिद्ध होता है कि भारतीय ज्ञान विश्व में सर्वश्रेष्ठ है। डॉ. प्रतीक मिश्रपुरी, अध्यक्ष भारतीय प्राच्य विद्या सोसायटी।