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प्रेम रावत के प्रवचन में लगा लोगों का जमावड़ा

Mon, 16 Nov 2015 10:30 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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देहरादून के परेड ग्राउंड में आयोजित हुए प्रेम रावत के प्रवचन में लोगों का जमावड़ा लग गया।
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अपने प्रवचन में प्रेम रावत ने कहा कि शांति मनुष्य की बुनियादी जरूरत है। अशांति से बचने के लिए संसार में शांति स्थापित करनी होगी। मनुष्य ने पूरे विश्व में मनुष्यों सहित अन्य जीव-जंतुओं को भी अशांत कर रखा है। मनुष्य यह भूल गया है कि श्वास का आना-जाना ही बनाने वाले की सबसे बड़ी कृपा है।

विश्वभर में सब भगवान के नाम पर एक-दूसरे से लड़ रहे हैं। इससे बचने के लिए जीवन में शांति लानी होगी। यह विचार रविवार को परेड ग्राउंड में राज विद्या केंद्र की ओर से आयोजित प्रवचन कार्यक्रम के दौरान शांतिदूत प्रेम रावत ने व्यक्त किए।
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इससे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रेम रावत का स्वागत करते हुए कहा कि जिस प्रकार गंगा एवं हिमालय विश्व को प्रेम का संदेश देते हैं। उसी प्रकार प्रेम रावत भी प्रेम एवं मानवता का संदेश देते हैं।

उन्होंने कहा कि हमारे जीवन को सार्थक करने में प्रेम रावत की ओजस्वी वाणी फलदाई होगी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने भी स्वयं बैठकर प्रवचन सुना। इस मौके पर गृह सचिव उमाकांत पंवार, एसएसपी सदानंद दाते आदि उपस्थित थे।

दून में प्रेम रावत के प्रवचन 40 साल बाद आयोजित हुए हैं। इसी कारण राज्यभर से लोग उन्हें सुनने पहुंचे। इसके अलावा यूपी, दिल्ली, एमपी, हिमाचल आदि जगहों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचे। सभी जगहों से श्रद्धालुओं को लाने के लिए बसों की व्यवस्था की गई थी। प्रेम रावत को मलेशिया में एशिया पैसिफिक ब्रांड एसोसिएशन की ओर से लाइफ टाइम एचीवमेंट पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

बरेली से एके करण पत्नी आरती और बच्चों के साथ प्रवचन सुनने दून पहुंचे। एके के हाथ में फैक्चर होने की वजह से प्लास्टर लगा हुआ है, लेकिन उन्होंने इसकी परवाह नहीं की। उन्होंने कहा कि प्रेम रावत का प्रवचन सुनकर वह बेहद खुश हैं। इससे उन्हें शांति मिलती है।

बदायूं से आए श्याम बिहारी भी हर जगह प्रेम रावत का प्रवचन सुनने के लिए पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि मुझे प्रेम रावत के प्रवचन में असीम शांति मिलती है। वाकई में हम सभी को इस संदेश को चारो ओर फैलाना चाहिए ताकि देश समृद्धि की ओर बढ़ सके।

बरेली से आए मोहन लाल भी शांति का संदेश सुनने के लिए दून पहुंचे। बकौल मोहन लाल चाहे मुझे कितने भी आवश्यक काम हों मैं सबकुछ छोड़कर इनके प्रवचन सुनने के लिए निकल पड़ता हूं। इससे मुझे आत्मिक शांति का अहसास होता है।
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बरेली से आईं शांति देवी भी प्रवचन सुनकर बेहद खुश हैं। शांति ने कहा कि दून जैसे शांत वातावरण में शांतिदूत का प्रवचन बढ़िया संयोग है। इसकी साक्षी बनकर मैं खुश हूं। उन्होंने आम लोगों से भी शांति का संदेश फैलाने का आह्वान किया।
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