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...जब निकल आए इकठ्ठे कई 'दशरथ माझी'

Sat, 08 Nov 2014 02:36 PM IST
विनय बहुगुणा/अमर उजाला, कर्णप्रयाग
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एक दशरथ माझी ने इश्क के आगे पहाड़ को बौना साबित कर दिया था लेकिन यहां समस्याओं और सिस्टम की मार से बेबस इकठ्ठे कई दशरथ माझी उम्मीद की एक किरण में घरों से बाहर निकल आए।
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ले मशाले चल पड़े हैं लोग मेरे गांव के, अब अंधेरा जीत लेंगे लोग मेरे गांव के... इन पक्तियों को गाते हुए उत्तराखंड के कर्णप्रयाग में सुंदर गांव के लोगों ने खुद अपनी सड़क बनाने की पहल की।

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तीन दिन में मार्ग निर्माण शुरू कराने का आश्वासन
आठ वर्षों से जिस सड़क के लिए ग्रामीण पथराई आंखों से इंतजार कर रहे हैं, उसे बनाने के लिए उन्होंने स्वयं गैंती, फावड़ा, कुदाल लेकर दिनभर श्रमदान किया। शर्म और जनविरोध के बाद लोनिवि के जेई भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने ग्रामीणों को तीन दिन में मार्ग निर्माण शुरू कराने का आश्वासन दिया।
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सोमवार को प्रात: आठ बजे से सुंदरगांव के युवा से लेकर बुजुर्ग चंद्र सिंह, राम सिंह और मोहन सिंह के नेतृत्व में तातापाणी नामक स्थान पर पहुंचे। यहां पर उन्होंने रिठोली बैंड-सुदंरगांव-कनोठ मार्ग निर्माण के लिए श्रमदान शुरू किया।

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विधायक को भी कई बार अवगत कराया
ग्रामीणों का कहना था कि वर्ष 2006 में स्वीकृत रिठोली बैंड-सुंदरगांव-कनोठ मोटर मार्ग निर्माण के लिए विभाग उन्हें सिर्फ आश्वासन ही देता आ रहा है। पूर्व एवं वर्तमान विधायक को भी कई बार समस्या से अवगत कराया। किसी ने सुध लेना तक उचित नहीं समझा।

वयोवृद्ध चंद्र सिंह कहते हैं कि रविवार को पंचायत की बैठक में निर्णय लिया गया था, कि सड़क निर्माण का कार्य अब ग्रामीण श्रमदान कर करेंगे। सोमवार सुबह आठ बजे से सभी ग्रामीणों ने श्रमदान शुरू किया।

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आठ साल में सिर्फ 1.5 किमी बनी सड़क
वर्ष 2006 में रिठोली बैंड से कनोठ गांव तक के लिए छह किमी मोटर मार्ग स्वीकृत किया गया। इस मार्ग से सुंदरगांव, कोलीपाणी, कल्यागाड़, कोली, भटोली,गैरोली और कनोठ गांव की करीब चार हजार से अधिक की आबादी को लाभ मिलना था। लेकिन रिठोली बैंड से तातापाणी तक सिर्फ 1.5 किमी ही मोटर मार्ग का निर्माण हो पाया।

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सड़क को लेकर विवाद भी हुआ
मोटर मार्ग के सर्वे के दौरान पूर्व में सुंदर गांव एवं जाख गांव के ग्रामीणों का भूमि को लेकर विवाद हो गया था। भले ही बाद में दोनों गांवों की आपसी सहमति से मामला सुलझ गया था।

सड़क के अभाव में गई जान
बीते वर्ष मार्च में सुंदर गांव में एक बालिका को गुलदार ने गंभीर रूप से घायल कर दिया था। उसे चार किमी पैदल चलकर सड़क तक पहुंचाते हुए सीएचसी कर्णप्रयाग लाया गया था। लेकिन तब तक वह दम तोड़ चुकी थी। इससे पहले भी भालू के हमले में एक महिला की समय पर उपचार न मिलने से मौत हो गई थी।

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इनका कहना है
उम्र के 81वें वर्ष में पहुंच चुके हैं। लेकिन गांव आज तक सड़क से नहीं जुड़ पाया है। गांव तक एक सिलेंडर पहुंचाने के लिए भी 150 सौ रुपये भाड़ा देना पड़ता है। पंचायत की बैठक के बाद ग्रामीणों ने श्रमदान कर सड़क बनाने का निर्णय लिया।
- राम सिंह/ चंद्र सिंह/मोहन सिंह सगोई निवासी सुंदर गांव

सरकार और विभाग ग्रामीणों की सुध नहीं ले रहे हैं। ऐसे में हमने श्रमदान कर मोटर मार्ग का निर्माण करने की सोची। खेतीबाड़ी सहित अन्य घरेलू काम छोड़कर कई महिलाएं सुबह ही पहुंच गई थी। गांव के लिए सड़क की इच्छा लिए सभी श्रमदान को घरों से निकले।
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- गुड्डी देवी/रुकमणी देवी/शशिकला देवी निवासी सुंदर गांव
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