पिछले दिनों निजाम बदलने की चर्चाओं को इतने पंख लग गए कि हर कोई इन पर यकीन कर उठा, बस अब तो बदलाव होने वाला है।
कहीं शोरगुल था तो कहीं आतिशबाजी। बस नतीजे पर पहुंचने की कमी थी। यह उस दिन की बात थी जिस दिन सूबे के मुखिया दिल्ली में थे। एक निजी कार्यक्रम में जाना था। इसके लिए कुछ हाकिमों को भी बुलाया गया था। जैसे ही हाकिम पहुंचे तो निजाम ने सरकारी गाड़ी के बजाय अपना निजी वाहन निकालने के लिए कहा।
गफलत पैदा करने वाला जवाब
हाकिम देखकर हैरत में थे। कारण पूछा तो जवाब भी गफलत पैदा करने वाला था। यह उस दिन की बात है जिस दिन निजाम के इस्तीफे की खूब चर्चा थीं। दिल्ली से लेकर देहरादून तक सब यही कह रहे थे कि दस जनपथ में इस्तीफा रखवा लिया गया है।
इस्तीफे की खबरों के बीच सूबे के मुखिया का निजी वाहन से सफर करना मामले को और ज्यादा गंभीर बना गया। हालांकि बाद में अभी तक ऐसा कुछ नहीं मिला। लेकिन कई बार सरकार के स्तर से ही अफवाहों को हवा देने वाली गतिविधियां हुई। अब किसी को समझ में नहीं आ रहा है कि बदलाव होगा या नहीं।