हिमाचल में 16 पुलिस अफसरों के तबादले किए गए हैं।
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स्वास्थ्य विभाग में हाल ही में जिन डॉक्टरों के तबादले हुए हैं, इनमें से आठ पूरी तरह नियम विरुद्ध और गलत हैं। इन आठ चिकित्सकों के तबादले स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी की संस्तुति पर किए गए हैं। खास बात यह है कि इनके लिए न तो शासन ने कोई प्रस्ताव भेजा और न ही मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति ने संस्तुति दी। जबकि ट्रांसफर पॉलिसी के अनुसार किसी भी तरह के तबादले में इस प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है। इनमें से दो डॉक्टर पिछले करीब एक वर्ष से गायब थे।
बीते 11 अगस्त को 20 चिकित्सकों के तबादले किए गए थे। इनमें से ज्यादातर का तबादला देहरादून किया गया जबकि अन्य को दूसरे स्थानों पर भेजा गया। अब इन तबादलों के पीछे का खेल खुलकर सामने आ गया है। बेहद जरूरी बताकर विभाग ने जो तबादले किए, उसकी आड़ में कई चहेतों को एडजस्ट किया गया।
22 जुलाई को शासन ने 13 डॉक्टरों के स्थानांतरण का प्रस्ताव तैयार किया। 29 जुलाई को स्वास्थ्य मंत्री ने अपनी ओर से आठ चिकित्सकों के ट्रांसफर का प्रस्ताव तैयार कर भेज दिया। शासन ने मंत्री की सूची में शामिल दो चिकित्सकों डॉ. राजकुमार और डॉ. हरीश द्विवेदी पर गंभीर अनुशासनहीनता के आरोपों का हवाला देते हुए उनके खिलाफ अनुशासनिक कार्यवाही की आवश्यकता भी जताई। बावजूद इसके दोनों डॉक्टरों समेत अन्य आठ को मनचाही तैनाती का लाभ दिया गया।
इन चिकित्सकों के लिए नियम रखे ताक पर
ट्रांसफर
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मंत्री के प्रस्ताव पर प्रमुख परामर्शदाता जिला चिकित्सालय पौड़ी डॉ. ताराचंद पंत को पीएमएस जेएलएन जिला चिकित्सालय रुद्रपुर, पीएमएस जेएलएन जिला चिकित्सालय रुद्रपुर डॉ. राजेंद्र पांडे को वरिष्ठ परामर्शदाता जेएलएन जिला चिकित्सालय रुद्रपुर, डॉ. भवानी पाल को प्रमुख अधीक्षक जिला अस्पताल पौड़ी से महिला चिकित्सालय हरिद्वार, डॉ. राजकुमार को बीडी पांडे चिकित्सालय नैनीताल से राजकीय संयुक्त चिकित्सालय रुड़की, डॉ. हरीश द्विवेदी को बीडी पांडे चिकित्सालय नैनीताल से एसपीएस चिकित्सालय ऋषिकेश, डॉ. राजेश कुमार को जिला चिकित्सालय चमोली से सीएचसी प्रेमनगर, डॉ. निर्दोष शर्मा को पीएचसी चंबा टिहरी से पुलिस लाइन देहरादून और डॉ. सुनील शर्मा को राजकीय एलोपैथी चिकित्सालय सेंधीखाल से ईएमओ सीएचसी कोटद्वार के पद पर स्थानांतरित किया गया।
ट्रांसफर पॉलिसी के प्रावधान
19 सिंतबर 2014 से लागू पीएमएचएस संवर्ग के अंतर्गत नियुक्त चिकित्साधिकारियों की तबादला नीति के नियम 3.7 के अनुसार सामान्य वार्षिक स्थानांतरण प्रत्येक दशा में 30 अप्रैल तक अनिवार्य हैं। पदोन्नति और प्रशासनिक अधिकार पर पूरे साल तबादले किए जा सकेंगे। हालांकि इसके लिए नीति के अंतर्गत गठित समितियों की संस्तुति अनिवार्य होगी। नियम 3.17 के अनुसार अपरिहार्य स्थित में तबादला प्रस्तावों पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति गठित होगी। इसमें प्रमुख सचिव या सचिव कार्मिक, प्रमुख सचिव या सचिव स्वास्थ्य सदस्य, अपर सचिव स्वास्थ्य सदस्य सचिव और महानिदेशक सदस्य होंगे। नियम 3.20 के अनुसार निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद सभी चिकित्सकों के स्थानांतरण प्रस्तावों पर स्वास्थ्य मंत्री को मुख्यमंत्री से अनुमोदन लेना होगा।
कई बार किया तबादला
विभाग में जहां कुछ चिकित्सकों का एक बार तबादला नहीं हो पा रहा है, वहीं चहेते चिकित्सकों को बार-बार इसका लाभ मिल रहा है। एलडी भट्ट चिकित्सालय काशीपुर में तैनात आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. राजीव गांधी का तबादला 28 अगस्त 2015 को सीएचसी धारचूला किया गया। उन्होंने वहां ज्वाइन नहीं किया तो 22 जून 2016 को उनका तबादला संशोधित कर सीएचसी रामनगर कर दिया गया। 19 जुलाई 2016 को उनका तबादला आदेश संशोधित कर वापस एलडी भट्ट चिकित्सालय काशीपुर भेज दिया गया।