इधर, विवेचना पूरी करते ही पुलिस ने जिला न्यायालय में केस दर्ज किया। दोनों पक्षों की सुनवाई पूरी होने के बाद मंगलवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अशोक कुमार सैनी की अदालत ने तीनों शिक्षिकाओं को दोषी पाते हुए पांच-पांच वर्ष के कठोर कारावास और 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
अदालत ने शिक्षा विभाग को भेजे आदेश की प्रति में कहा, विभाग ने बिना सत्यापन के फर्जी शिक्षकों को सेवा में नियुक्ति के अलावा स्थायीकरण भी दिया। यही नहीं प्रोन्नति भी बिना जांच के दी गई, जो घोर लापरवाही का परिणाम है, इसलिए संबंधित अफसरों पर भी विभागीय स्तर से कार्रवाई अमल में लाई जाए।