पंच केदारों में शामिल चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ के कपाट विधि-विधान और पूजा-अर्चना के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं।
अब छह माह तक भगवान रुद्रनाथ की पूजा-अर्चना गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर में होगी। रविवार को सुबह सात बजे कपाट बंद होने के मौके पर रुद्रनाथ पहुंचे करीब 80 श्रद्धालुओं ने भगवान रुद्रनाथ के दर्शन कर मनौतियां मांगी। समुद्र तल से करीब 2286 मीटर की ऊंचाई पर बुग्यालों के बीच स्थित रुद्रनाथ मंदिर में शिव के मुख की पूजा होती है।
यहां भगवान रुद्र की पाषाण प्रतिमा एक ओर झुकी हुई है। मान्यता है कि गौत्र हत्या के पाप से मुक्ति के लिए जब पांडव स्वर्ग जा रहे थे तो भगवान केदार उन्हें दर्शन नहीं देना चाहते थे। जब भोलेनाथ गुफा से पांडवों को देखने के लिए झांकने लगे तो पांडवों की दृष्टि पड़ते ही आधी झुकी पत्थर की प्रतिमा यहां स्थापित हो गई।
तब से यह धाम चतुर्थ केदार रुद्रनाथ के रूप में जाना जाता है। रविवार को तड़के रुद्रनाथ मंदिर में विशेष पूजाएं भी संपन्न हुई। अपराह्न साढ़े तीन बजे रुद्रनाथ की उत्सव डोली और बजीर की प्रतिमा के सगर गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने फूल-मालाओं से डोली का जोरदार स्वागत किया।
शाम पांच बजे डोली अपने शीतकालीन गद्दी स्थल गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर में पहुंची। यहां मौजूद सैकड़ों भक्तों ने रुद्रनाथ के दर्शन कर मनौतियां मांगी। इस मौके पर गोपीनाथ समग्र विकास समिति के अध्यक्ष सत्येंद्र रावत, बीकेटीसी के पूर्व अध्यक्ष अनसूया प्रसाद भट्ट, प्रवीण भट्ट आदि मौजूद थे।