विरासत महोत्सव में स्टाल पर सामान के ओवर रेटिंग की वीडियो बनाने को लेकर दुकानदारों और ओएनजीसी और आबकारी विभाग के दो अधिकारियों के बीच हाथापाई हो गई।
हंगामा होने पर पुलिस दोनों अधिकारियों को जबरन सरकारी वाहन से कैंट कोतवाली ले आई। गंभीर बात यह है कि पहचान बताने के बाद भी पुलिस ने दोनों अधिकारियों की एक नहीं सुनी। कई घंटे की गहमागहमी के बाद देर रात पुलिस ने सुलह होने का दावा किया है।
ओएनजीसी के बीआर अंबेडकर स्टेडियम में चल रहे विरासत सांस्कृतिक महोत्सव में बुधवार शाम ओएनजीसी और आबकारी विभाग के अधिकारी परिवार के साथ घूमने आए थे। महोत्सव में लगे स्टॉल पर सामान की ओवर रेटिंग को लेकर दोनों अधिकारियों ने एतराज जताया।
आरोप है कि दुकानदारों ने मोटी रकम देकर स्टॉल लेने की बात कही तो इनमें से एक अधिकारी ने मोबाइल निकालकर रिकार्डिंग शुरू कर दी। इसी बीच एक दुकानदार ने हाथापाई कर उनका मोबाइल छीन लिया। शोर शराबा होने पर ठेकेदार पक्ष से जुड़े लोग आ गए।
शोर-शराबा होने पर वहां हंगामा हो गया। इसी बीच दुकानदारों ने फोन कर पुलिस को बुला लिया। पुलिस दोनों अधिकारियों को जबरन पकड़कर कैंट कोतवाली ले आई। दोनों अधिकारियों के पकड़े जाने की सूचना पर कांग्रेस नेताओं का जमावड़ा लग गया। इन अधिकारियों का ताल्लुक कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता से पारिवारिक जुड़ाव है। इसी बीच पुलिस अधीक्षक नगर अजय सिंह भी कैंट कोतवाली आ गए। काफी देर तक गहमागहमी का दौर चलता रहा।
अधिकारियों का आरोप है कि दारोगा ने गाली-गलौज करते हुए उनके साथ मारपीट की। दूसरे पक्ष को लाने के बजाए उन्हें घसीटकर थाने लाया गया। मामला बढ़ता देख एसपी सिटी ने पीड़ित अधिकारियों के साथ बंद कमरेे में बातचीत की। बातचीत के बाद दोनों अधिकारी अपने परिचितों के साथ वापस लौट गए। अधिकारियों के समर्थन में गए एक जनप्रतिनिधि ने दावा किया कि दारोगा के सॉरी कहने पर यह मामला सुलटा है।
एसपी सिटी अजय सिंह का कहना है कि कुछ गलतफहमी हो गई थी, जो बातचीत से सुलझा ली गई है। हालांकि ओएनजीसी अधिकारी का कहना है कि वह चुप बैठने वाले नहीं है। वह कानूनी राय लेकर आगे की कार्रवाई करेंगे।