आरटीआई के तहत उपलब्ध हुए दस्तावेजों के मुताबिक जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद आबकारी निरीक्षक और उप आबकारी निरीक्षकों के सबंध में उप आबकारी आयुक्त प्रदीप कुमार को सौंपे जाने की बात कही गई थी।
इसके अलावा प्रधान आबकारी सिपाही और आबकारी सिपाहियों की भूमिका की जांच का जिम्मा सहायक आबकारी आयुक्त राजीव सिंह चौहान को सौंपने का दावा किया गया था। हकीकत ये है कि ये है कि विभाग के अन्य अफसरों की लापरवाही की थाह लगाने से पहले उच्चाधिकारी खुद ही वादाखिलाफी का शिकार हो गए। दस्तावेजों के मुताबिक जांच अधिकारी नामित किए जाने का पत्रालेख ही जारी नहीं किया गया।
जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले में आबकारी विभाग का रवैया कितना संजीदा है ये दस्तावेज उजागर कर रहे हैं। तथ्य ये है कि हृदयविदारक घटना के सात महीने बीत जाने के बाद आबकारी विभाग ने लापरवाह अफसरों के खिलाफ जांच और कार्रवाई की संस्तुति के लिए अधिकारी नामित करने की जरूरत समझी है।
इसके तहत जहीरीली शराब कांड मामले में आबकारी निरीक्षक और उप आबकारी निरीक्षकों के संबंध में अपर आबकारी आयुक्त प्रशासन आलोक पांडेय और प्रधान/ आबकारी सिपाहियों की भूमिका जांचने के लिए उप आबकारी आयुक्त प्रभाशंकर पांडेय जांच अधिकारी नामित किया गया है।